नई दिल्लीः रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय सेना किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार है. सेना डोकलाम में हर हलचल पर निरीक्षण कर रही है. रक्षामंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब चीन के राष्ट्रपति ने हाल में बयान दिया था कि चीन अपनी एक इंच जमीन के लिए भी खूनी संघर्ष को तैयार है. कुछ समय पहले ही डोकलाम के पास तक रेलवे सुविधा विकसित करने और हेलिपैड बनाने की खबरें आई थी.Also Read - Bitcoin: लोकसभा में वित्तमंत्री ने दिया लिखित जवाब, बिटक्वॉइन को करेंसी माने जाने के लिए कोई प्रस्ताव नहीं

रक्षा मंत्री ने रविवार को देहरादून में कहा कि हम सतर्क हैं और डोकलाम में किसी भी अप्रत्याशित घटना के लिए तैयार हैं. सेना के आधुनिकीकरण के लिए हम लगातार काम कर रहे हैं. हम क्षेत्रीय प्रभुता का पूरा ख्याल रख रहे हैं. डोकलाम में पिछले कुछ समय से चीन की तरफ से मिलने वाले दबाव के सवालों का जवाब देते हुए निर्मला सीतारमण ने यह बात कही. Also Read - भारत में इनकम टैक्स देने वालों की संख्या बढ़ी, वित्त मंत्री बोलीं- उनसे मिली राशि से हो रहे विकास कार्य

उन्होंने कहा कि सरकार सेना के आधुनिकीकरण के लिए काम कर रही है. उन्होंने बताया कि सेना किसी भी हालात का सामना करने में सक्षम है.गौरतलब है कि भारतीय राजदूत गौतम बंबावले ने आगाह किया था कि भारत-चीन सीमा पर यथास्थिति बदलने की किसी भी कोशिश से डोकलाम जैसा एक और संकट उत्पन्न हो सकता है. Also Read - 'चीन ने डोकलाम के पास बसाए गांव'; कांग्रेस का आरोप- 100 वर्ग किलोमीटर जमीन पर किया कब्जा, पर्दे के पीछे न छुपें पीएम

चीन में भारत के राजदूत ने क्या कहा था
चीन में भारत के राजदूत गौतम बंबावले ने कहा था कि पिछले साल के समाधान के बाद डोकलाम गतिरोध क्षेत्र में कोई बदलाव नहीं आया है. उन्होंने संकट के लिए चीन को दोष देते हुए कहा कि उसने यथास्थिति बदलने की कोशिश की जिससे यह गतिरोध उत्पन्न हुआ. चीन ने सिक्किम खंड के डोकलाम में सड़क निर्माण की गतिविधियां रोकने पर सहमति जताई जिसके बाद 73 दिनों तक चला गतिरोध पिछले साल 28 अगस्त को समाप्त हो गया.

बंबावले ने कहा कि डोकलाम में आज कोई तब्दीली नहीं हो रही है. वह इन रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया कर रहे थे कि चीनी सेना ने क्षेत्र में बुनियादी ढांचा निर्माण कार्य तेज कर दिया है. भारतीय राजदूत ने हांगकांग से प्रकाशित दैनिक ‘साऊथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि शायद चीनी पक्ष ज्यादा सैनिकों को रखने के लिए ज्यादा सैन्य बैरक बना रहा हो, लेकिन वह जगह संवेदनशील क्षेत्र से खासा पीछे है.