नई दिल्ली: भारत में रूस के राजदूत निकोले कुदाशेव ने शुक्रवार को कहा कि रूस यह जानने को उत्सुक नहीं है कि कश्मीर में क्या हो रहा है और जिन्हें इस क्षेत्र के लिए नयी दिल्ली की नीति और घाटी की स्थिति को लेकर संदेह है, वे वहां का दौरा कर सकते हैं. उन्होंने यह बयान एक संवाददाता सम्मेलन में उस समय दिया जब उनसे सवाल किया गया कि वह अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर सहित 15 विदेशी दूतों के समूह में शामिल क्यों नहीं थे, जिन्होंने पिछले सप्ताह जम्मू-कश्मीर का दौरा किया था.

बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दा उठाने के चीन के असफल प्रयास पर रूसी राजदूत ने कहा कि मास्को कभी भी इस पक्ष में नहीं रहा है कि इसे वैश्विक निकाय में ले जाया जाए क्योंकि यह भारत और पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मामला है. दूतों की जम्मू कश्मीर यात्रा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि रूस को यह जानने में कोई रुचि नहीं है कि केंद्र शासित प्रदेश में क्या हो रहा है क्योंकि इस क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण पर उसे कोई संदेह नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि मेरे वहां जाने का कोई कारण था. जम्मू कश्मीर पर भारत का निर्णय इसका आंतरिक मामला है जो भारत के संवैधानिक दायरे से संबंधित है.’’

उन्होंने कहा, “यह हमारे द्विपक्षीय संबंधों में कोई मुद्दा नहीं है. जो लोग मानते हैं कि यह एक मुद्दा है, जो लोग कश्मीर की स्थिति को लेकर चिंतित हैं, जिन्हें कश्मीर में भारतीय नीति के बारे में संदेह है, वे कश्मीर की यात्रा कर सकते हैं. वे खुद देख सकते हैं. हमें कभी कोई संदेह नहीं था.’’

कुदाशेव ने साथ ही कहा कि उन्हें यात्रा के लिए आधिकारिक निमंत्रण नहीं मिला था. उन्होंने कहा, “मेरा विचार है कि भारत में रूसी राजदूत को किसी भी ऐसी गतिविधियों से नहीं जुड़ना चाहिए जिससे भारत की आंतरिक नीतियों को लेकर संदेह पैदा होता है. यह हमारी आदत में नहीं है.’’ यह पूछे जाने पर कि क्या आमंत्रित किए जाने पर वह कश्मीर का दौरा करना चाहेंगे, उन्होंने मजाकिया लहजे में जवाब दिया: “हां, मैं करूंगा.”

कुदाशेव ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय बैठक में भाग लेने के लिए 22 और 23 मार्च को रूस जाएंगे. सुरक्षा परिषद में कश्मीर मुद्दा उठाने की चीन की कोशिशों पर कुदाशेव ने कहा कि उनके देश ने कभी भी ऐसे कदम का समर्थन नहीं किया है. उन्होंने कहा कि शिमला समझौते और लाहौर घोषणापत्र के आधार पर यह पूरी तरह से भारत और पाकिस्तान के बीच का द्विपक्षीय मामला है.’’

(इनपुट भाषा)