West Bengal Assembly Election 2021: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी को बड़ा झटका लग चुका है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद खास माने जाने वाले तृणमूल कांग्रेस के नेता शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी से नाराजगी के बीच मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. बता दें कि इससे एक दिन पहले ही उन्होंने हुगली रिवर ब्रिज कमीशन के चेयरमैन के पद से इस्तीफा दिया था. बता दें कि शुभेंदु अधिकारी ने केवल मंत्री पद से इस्तीफा दिया है पार्टी में वे अब भी बने हुए हैं, लेकिन इस इस्तीफे के बाद से TMC से शुभेंदु के अलग होने को लेकर अटकले तेज हो गई हैं.Also Read - ईद पर ममता बनर्जी ने साधा BJP पर निशाना, कहा- देश में चल रही है अलगाव की राजनीति

बता दें कि काफी वक्त से शुभेंदु के भाजपा में शामिल होने को लेकर खबरें चल रही थीं. बीते दिनों कैबिनेट की हुई बैठक में शुभेंदु अधिकारी व अन्य 2 मंत्री नहीं पहुंचे थे. इसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि शुभेंदु अमित शाह के संपर्क में हैं और टीएमसी और मंत्रीपद दोनों का ही त्याग कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं. बता दें कि शुभेंदु अगर टीएमसी से इस्तीफा देकर जाते हैं तो यह ऐसा नुकसान होगी जिसकी भरपाई टीएमसी में कोई भी नेता नहीं कर पाएगा. क्योंकि शुभेंदु अधिकारी करीब 30-40 सीटों पर अच्छा खासा प्रभाव रखते हैं. Also Read - Top 25 News: पेट्रोल-डीजल की कीमत पर ममता बनर्जी ने किया बीजेपी पर पलटवार

गौरतलब है कि बीते दिनों से ही खबरें आ रही थीं कि शुभेंदु अधिकारी टीएमसी से नाराज चल रहे हैं और भाजपा में शामिल हो सकते हैं. हालांकि अभी शुभेंदु का अगला दाव क्या होगा यह किसी को नहीं पता लेकिन पार्टी में बगावत की बू जरूर आने लगी है. ऐसा लगने लगा है कि अब वे TMC को त्यागने का मन बना चुके हैं. हालांकि देखना यही है कि उनका अगला फैसला क्या होने वाला है. Also Read - Bengal News: टीएमसी ने शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव आयोग में दर्ज कराई शिकायत, लगाया यह आरोप

बता दें कि शुभेंदु पश्चिम बंगाल में काफी ताकतवर राजनीतिक परिवार से आते हैं. ऐसे में उनका प्रभाव केवल उनके क्षेत्र में ही नहीं बल्की पूर्वी मिदनापुर और उसके आस पास के जिलों में काफी है. ऐसे में राजनीतिक दबदबे का फायदा TMC को हमेशा होता आया है. खबरों की मानें तो ममता बनर्जी के भतीजे और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के साथ शुभेंदु अधिकारी के रिश्ते कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं. वहीं प्रशांत किशोर के आने के बाद पार्टी में जिस तरह का बदलाव देखने को मिला है उससे भी पार्टी के नेताओं के बीच मनमुटाव है.