
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में इस बार 34 लाख लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू (SIR) के दौरान इनका नाम वोटर लिस्ट से कट गया था. कुल 34 लाख 35 हजार 174 लोगों ने अदालत में अपील दायर की थी. याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि मतदाताओं को बिना किसी उपाय के नहीं छोड़ा जाना चाहिए, खासकर तब जब 23 अप्रैल को मतदान होना निर्धारित है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने वोटर्स को अंतरिम अधिकार देने से इनकार कर दिया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि यह राज्य बनाम चुनाव आयोग की लड़ाई नहीं है. बंगाल का वोटर दोनों के बीच फंसा हुआ है.
वोटर लिस्ट में संशोधन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा, “हम ऐसी स्थिति पैदा नहीं कर सकते, जिससे अपीलीय ट्रिब्यूनल के जजों पर काम का बोझ बढ़ जाए. हमारे पास एक और याचिका भी है, जो इन अपीलों पर रोक लगाने की मांग करती है.” जस्टिस बागची ने आयोग से कहा- “मान लीजिए कि जीत का अंतर 2% है और 15% मतदाता वोट नहीं डाल सके, तो हमें इस पर सोचना होगा. यह चिंता का मामला हो सकता है. यह मत समझिए कि बाहर किए गए मतदाताओं का सवाल हमारे दिमाग में नहीं है.”
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से तृणमूल कांग्रेस के नेता और वकील कल्याण बनर्जी ने केस की पैरवी की. उन्होंने कहा, “कम से कम 16 लाख अपीलें दायर की गई हैं. उन्हें इस महीने के आखिर में होने वाले दो चरणों वाले विधानसभा चुनाव में वोट डालने की इजाज़त दी जानी चाहिए.” CJI ने जवाब में कहा, “यह तो बिल्कुल भी मुमकिन नहीं है. अगर हम इसकी इजाजत देते हैं, तो इसमें शामिल लोगों के वोटिंग अधिकार रोकने पड़ेंगे.”
कोर्ट बोला-100% सटीकता की उम्मीद नहीं कर सकते
जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया में काम कर रहे न्यायिक अधिकारियों से भी जांच प्रक्रिया के दौरान कुछ गलतियां हुई होंगी. उन्होंने कहा- “न्यायिक अधिकारियों से 100% सटीकता की उम्मीद नहीं की जा सकती, क्योंकि वे बहुत प्रेशर में काम कर रहे हैं.” जस्टिस बागची ने कहा कि जब कोई अधिकारी रोज 1000 से ज्यादा दस्तावेजों की जांच करता है और समयसीमा भी कड़ी होती है, तो 70% सटीकता भी बेहतरीन मानी जाएगी. इसलिए एक मजबूत अपीलीय तंत्र जरूरी है.
SIR से बंगाल में 11.85% नाम हटे
पश्चिम बंगाल में अक्टूबर 2025 में कुल वोटर 7.66 करोड़ थे. SIR प्रोसेस के दौरान इनमें से अब तक 90.83 लाख नाम हटाए गए. यानी करीब 11.85% वोटर कम हो गए. अब राज्य में 6.76 करोड़ वोटर हैं. जांच के तहत आए 60.06 लाख वोटरों में से 27.16 लाख के नाम हटाए गए. बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में भी बड़े स्तर पर नाम हटाए गए हैं. इसके अलावा नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख में से 3.25 लाख नाम काटे गए हैं.
पश्चिम बंगाल कब होंगे विधानसभा के चुनाव?
पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीटें हैं. बहुमत का आंकड़ा 148 है. वोटरों की संख्या 7 करोड़ 4 लाख है. इसमें 3 करोड़ 60 लाख पुरुष वोटर्स हैं. 3 करोड़ 44 लाख महिला वोटर्स हैं. राज्य में दो फेज में वोटिंग होनी है. पहले फेज में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे. दूसरे फेज में 29 अप्रैल को 142 सीटों पर वोट पड़ेगा. नतीजे 4 मई को आने हैं.
2021 के चुनाव का हाल?
राज्य में 2021 में विधानसभा चुनाव हुए थे. 213 सीटें जीतकर TMC सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. TMC का वोट शेयर 48% था. BJP ने 77 सीटें अपने नाम की. वोट शेयर 38.1% रहा. अन्य के खाते में 2 सीटें गई थीं. वोट शेयर 10% था.
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