
Tanuja Joshi
हल्द्वानी से दिल्ली के बड़े न्यूजरूम तक... तनुजा जोशी, उत्तराखंड के शांत और खूबसूरत शहर हल्द्वानी से ताल्लुक रखती हैं. देहरादून के ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी ... और पढ़ें
West Bengal Assembly Election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक माहौल तेजी से गर्म हो चुका है. इस बार राज्य में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी बीजेपी (Bharatiya Janata Party) के बीच माना जा रहा है. चुनाव आयोग के शेड्यूल के अनुसार राज्य में दो चरणों में मतदान होगा. पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को होगा, जबकि नतीजों की घोषणा 4 मई को की जाएगी.
पिछले विधानसभा चुनाव 2021 में ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की अगुवाई वाली टीएमसी (TMC) ने शानदार जीत दर्ज करते हुए 294 में से 213 सीटें जीती थीं. वहीं, बीजेपी 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी थी. अब 2026 के चुनाव में दोनों ही पार्टियां अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रही हैं. ऐसे में कई बड़े मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में आ गए हैं.
पश्चिम बंगाल के चुनावी मुद्दों में सबसे प्रमुख सवाल रोजगार और आर्थिक विकास का है. विपक्ष का आरोप है कि राज्य में उद्योगों की कमी के कारण युवाओं के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर नहीं बन पा रहे हैं. कई बार ये भी कहा जाता है कि बड़ी कंपनियां बंगाल में निवेश करने से हिचकती हैं.
दूसरी तरफ राज्य सरकार का दावा है कि पिछले कुछ सालों में इन्फ्रास्ट्रक्चर, सड़क, परिवहन और सामाजिक योजनाओं के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की गई है. सरकार का कहना है कि नए निवेश और योजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
भ्रष्टाचार भी इस चुनाव का बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है. शिक्षक भर्ती से जुड़े कथित घोटाले को लेकर राज्य की राजनीति में लंबे समय तक विवाद रहा है. इस मामले में कई नेताओं और अधिकारियों के खिलाफ जांच भी हुई. विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाते हुए सरकार पर निशाना साध रहा है. वहीं, टीएमसी का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा का मुद्दा भी लंबे समय से चर्चा में रहा है. कई चुनावों के दौरान राजनीतिक टकराव और हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं. विपक्ष का आरोप है कि राज्य में कानून-व्यवस्था कमजोर है और राजनीतिक हिंसा को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए. वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इन आरोपों को खारिज करते हुए कहती रही हैं कि राज्य में शांति और विकास की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है.
बीजेपी इस चुनाव में घुसपैठ और सीमा सुरक्षा के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठा रही है. पार्टी का कहना है कि राज्य की सीमाओं से अवैध घुसपैठ एक गंभीर समस्या है, जिसे कंट्रोल करना जरूरी है. बीजेपी का दावा है कि ये मुद्दा राज्य की सुरक्षा और संसाधनों से जुड़ा हुआ है. वहीं, टीएमसी का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है.
इस बार चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी राजनीतिक विवाद देखने को मिला. राज्य सरकार और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी बहस हुई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को कई मंचों पर उठाया है और कहा है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय हो सकती है. वहीं, विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी है.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में कल्याणकारी योजनाओं की भी बड़ी भूमिका रही है. राज्य सरकार की कई योजनाएं जैसे लक्ष्मी भंडार, स्वास्थ्य साथी और छात्र-छात्राओं के लिए चलाई जा रही स्कीमें काफी लोकप्रिय रही हैं. टीएमसी इन योजनाओं को अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करती है और कहती है कि इससे लाखों लोगों को सीधे फायदा मिला है. वहीं, दूसरी तरफ बीजेपी का आरोप है कि कई केंद्रीय योजनाओं को राज्य में सही तरीके से लागू नहीं किया गया, जिससे लोगों को पूरा लाभ नहीं मिल पाया.
राज्य की राजनीति में सिंगूर का मुद्दा भी समय-समय पर सामने आता रहा है. सिंगूर आंदोलन ने कभी राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी थी और उसी के बाद टीएमसी को सत्ता तक पहुंचने का रास्ता मिला था. अब एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो रही है. कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा ग्रामीण वोटरों को प्रभावित कर सकता है.
चुनाव में सीटों के साथ-साथ वोट शेयर भी काफी अहम भूमिका निभाता है. पिछले चुनाव में टीएमसी का वोट शेयर करीब 50 प्रतिशत के आसपास था, जबकि भाजपा का वोट शेयर तेजी से बढ़कर लगभग 38 प्रतिशत तक पहुंच गया था. अगर इस बार वोट प्रतिशत में थोड़ा भी बदलाव होता है तो चुनावी परिणाम काफी अलग हो सकते हैं. यही कारण है कि दोनों पार्टियां हर वर्ग के मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही हैं.
इन सभी मुद्दों के बीच पश्चिम बंगाल का चुनाव बेहद दिलचस्प माना जा रहा है. एक तरफ ममका लगातार चौथी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही हैं, वहीं Bharatiya Janata Party पहली बार राज्य में सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में है. अब सबकी नजर 23 और 29 अप्रैल को होने वाले मतदान पर है. असली तस्वीर 4 मई को सामने आएगी.
| विषय | जानकारी |
|---|---|
| राज्य | पश्चिम बंगाल |
| कुल विधानसभा सीटें | 294 |
| मुख्य मुकाबला | TMC बनाम BJP |
| पहला चरण मतदान | 23 अप्रैल 2026 |
| दूसरा चरण मतदान | 29 अप्रैल 2026 |
| मतगणना | 4 मई 2026 |
| 2021 में TMC सीटें | 213 |
| 2021 में BJP सीटें | 77 |
| मुख्य चुनावी मुद्दे | रोजगार, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था, घुसपैठ, कल्याणकारी योजनाएं |
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