नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पश्चिम बंगाल भाजपा की उस अर्जी को विचारार्थ स्वीकार करने से मना कर दिया जिसमें 2013 में ममता बनर्जी सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल में फरवरी और मार्च के बीच 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के चलते लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर लगायी गई रोक को पलटने का अनुरोध किया गया था.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की एक पीठ ने अर्जी विचारार्थ स्वीकार करने को लेकर अनिच्छा जतायी जिसके बाद वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने उसे वापस ले लिया. अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने रिट याचिका वापस लेने के लिए इस अदालत की इजाजत मांगी है. रिट याचिका वापस ली हुई मानकर खारिज की जाती है.’’ पीठ ने शुरू में आदेश के खिलाफ पार्टी के कदम पर सवाल उठाया और कहा, ‘‘आप 2013 के आदेश को चुनौती दे रहे हैं?’’

अधिवक्ता ने कहा, ‘‘हां, लेकिन इसे प्रत्येक वर्ष लगाया जाता है.’’ अधिवक्ता ने कहा कि शीर्ष अदालत ने हाल में पार्टी को रथयात्रा के लिए अनुमति के वास्ते राज्य सरकार से सम्पर्क करने की इजाजत दी थी और लाउडस्पीकरों के बिना उसका (रथयात्रा) का कोई मतलब नहीं होगा. पीठ ने कहा, ‘‘हम यह नहीं कह रहे हैं कि आप देर से आये हैं.’’ पीठ ने कहा कि बच्चे भी अपनी बोर्ड परीक्षाएं दे रहे हैं. रोहतगी ने कहा कि पार्टी की अभिव्यक्ति की आजादी भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है और रैलियां और रथयात्रा करने के लिए लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल जरूरी है.

चूंकि शीर्ष अदालत अर्जी खारिज करने को तैयार थी, इसलिये अधिवक्ता ने उसे वापस लेने की पेशकश की जिसकी न्यायालय ने इजाजत दे दी. न्यायालय ने इसके साथ ही रोहतगी के इस अनुरोध को भी इजाजत नहीं दी कि पार्टी को इस मुद्दे पर कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख करने की अनुमति दी जाए. न्यायालय ने कहा, ‘‘यदि आप उसे वापस लेना चाहते हैं तो उसे वापस ले लीजिये. हम उच्च न्यायालय जाने की इजाजत नहीं दे रहे हैं.”