कोलकाता। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने महेशतला विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में प्रभावशाली और बड़े अंतर से जीत दर्ज कर फिर अपना डंका बजाया. भारतीय जनता पार्टी के लिए संतोषजनक बात ये रही कि वह दूसरे नंबर पर रही. मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) तीसरे स्थान पर रही.

टीएमसी की बड़ी जीत

तृणमूल के उम्मीदवार दुलाल दास ने अपने करीबी प्रतिद्वंद्वी भाजपा के सुजीत कुमार घोष पर 62,896 मतों से जीत दर्ज की. दास को 1,04,818 वोट और घोष को 41,992 वोट मिले. कांग्रेस समर्थित माकपा उम्मीदवार प्रवत चौधुरी 30,316 वोट ही हासिल कर पाए. 2016 के विधानसभा चुनावों में माकपा उम्मीदवार शामिक लाहिणी दूसरे स्थान पर रहे थे. तब तृणमूल प्रत्याशी कस्तूरी दास ने जीत हासिल की थी. कस्तूरी दास के निधन के कारण उपचुनाव कराया गया है. दुलाल, कस्तूरी दास के पति हैं.

उपचुनाव नतीजों में बीजेपी को करारा झटका, विपक्ष ने 14 में से 11 सीटों पर जमाया कब्जा

राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा में तृणमूल के 215 विधायक हैं. दास ने जीत के बाद कहा कि यह ममता बनर्जी और विकास की उनकी राजनीति की जीत है. दूसरी ओर, भाजपा उम्मीदवार घोष ने संतोष व्यक्त किया कि 2016 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 14,909 वोट मिले थे जबकि इस बार 41,987 वोट मिले.

उपचुनाव में भले ही टीएमसी की जीत हुई हो लेकिन बीजेपी के लिए भी इसके अच्छे संकेत हैं. पिछले कुछ सालों में बीजेपी ने यहां खुद को लगातार मजबूत किया है. अध्यक्ष अमित शाह की अगुवाई में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोरदार अभियान भी चलाया था. बीजेपी का लक्ष्य यहां खुद को प्रमुख लड़ाई में लाना है जिसमें अब वह कामयाब होती भी दिख रही है. पंचायत चुनाव में भी बीजेपी सीपीएम को धकेलकर दूसरे नंबर पर रही थी. अब यहां मुख्य मुकाबला टीएमसी और बीजेपी के बीच ही नजर आता है.

भारी पड़ा विपक्ष

बता दें कि लोकसभा की 4 सीटों और 10 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के नतीजों में विपक्षी गठबंधन भारतीय जनता पार्टी पर भारी पड़ा है. बीजेपी गठबंधन को कुल 14 सीटों में 11 पर करारी हार झेलनी पड़ी है. एक लोकसभा सीट पर बीजेपी ने जीत दर्ज की जबकि एक जगह उसका समर्थित उम्मीदवार जीता है. वहीं बाकी दो लोकसभा सीटों पर विपक्ष दल भारी पड़े हैं. ये दोनों सीटें बीजेपी ने अपने ही राज्य यूपी और महाराष्ट्र में गंवाए हैं. विधानसभा उपचुनाव में भी बीजेपी को करारी हार का सामना करना पड़ा है. कुल 10 सीटों में उसे सिर्फ उत्तराखंड में ही एक सीट पर जीत मिली.