नई दिल्ली। 2019 आम चुनाव का आहट के बीच तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद तेज होती जा रही है. इसे लेकर प. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पूरी तरह सक्रिय हो चुकी हैं और बड़े नेताओं से मिलने का सिलसिला शुरू कर दिया है. चार दिन के दिल्ली दौरे पर आईं ममता बनर्जी ने आज यहां कई नेताओं से मुलाकात की. सबसे खास रही एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात जिसे लेकर दिन भर ऊहापोह की स्थिति बनी रही. इससे पहले तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव, ममता बनर्जी से मुलाकात कर तीसरे मोर्चे के गठन का बिगुल फूंक चुके हैं. Also Read - BJP विधायक सुरेंद्र सिंह का विवादित बयान, कहा- 'ममता बनर्जी 'राक्षसी' संस्कृति की, उनके DNA में...'

भारी सस्पेंस के बीच सीएम ममता ने आज दिल्ली में एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की. शरद पवार ने पहले इस मुलाकात की बात को खारिज कर दिया था लेकिन बाद में दोनों के बीच ये पवार के ऑफिस में ये मुलाकात हुई. इसके पहले ममता ने एनडीए से अलग हो चुकी शिवसेना के सांसद संजय राउत से भी मुलाकात की. इससे पहले डीएमके नेता कनिमोई, वाईएसआर कांग्रेस और बीजेडी के सांसदों ने भी ममता के ऑफिस में उनसे मुलाकात की. एनडीए सरकार से अलग हुई. बीजेपी और एनडीए से नाता तोड़ चुकी टीडीपी के सांसदों ने भी ममता से मुलाकात की. इसके अलावा ममता बनर्जी संसद में मीसा भारती से भी मिलीं.

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ममता बनर्जी से नेताओं की मुलाकात का सिलसिला ऐसे वक्त पर हो रहा है जब संसद में टीडीपी और वाईएसआर ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है. हालांकि भारी हंगामे के बीच अभी तक इसे पेश नहीं किया जा सका है. गुजरात चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही ममता गैर कांग्रेस-गैर बीजेपी फ्रंट बनाने के लिए सक्रिय हो चुकी थी. यूपी लोकसभा चुनाव में बीजेपी की करारी हार के बाद विपक्षी खेमा और सक्रिय हो गया है. तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव ने ममता से मुलाकात कर तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद तेज की. उन्होंने सभी गैर बीजेपी-गैर कांग्रेस दलों से एक मंच पर आने की अपील की.

तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि हालिया समय में कई पुराने दोस्तों ने बीजेपी का साथ छोड़ा है. इनमें उसकी सबसे पुरानी सहयोगी शिवसेना भी है. टीडीपी ने भी आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने के नाम पर एनडीए से किनारा कर लिया. कुछ छोटे दलों ने भी एनडीए का साथ छोड़ दिया है. अब ममता की कोशिश है इन सभी दलों को एक मंच पर लाकर तीसरे मोर्चे का गठन किया जाए. इसी सिलसिले में वह तमाम दलों के नेताओं से मुलाकात कर तीसरे मोर्चे को आकार देने की कोशिश में हैं.