नई दिल्ली। 2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और यूपीए संयोजक सोनिया गांधी की कोशिशों को करारा झटका लगा है. बताया जा रहा है कि सोनिया गांधी की प्रस्तावित डिनर पार्टी से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दूरी बना ली है. हालांकि तृणमूल कांग्रेस से डेरेक ओ-ब्रायन और सुदीप बंदोपाध्याय सोनिया के डिनर कार्यक्रम में शामिल होंगे. सोनिया गांधी की तरफ से 13 मार्च को डिनर पार्टी का आयोजन किया जा रहा है जिसमें तमाम विपक्षों दलों को आमंत्रित किया गया है.

2019 लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने पूरी तरह कमर कस ली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी को सत्ता से दूर रखने के लिए सोनिया गांधी अभी से पूरे विपक्ष को साथ लाने की कवायद में लगी हुई हैं. सोनिया गांधी ने विपक्षी दलों के नेताओं को डिनर पार्टी में बुलाया है ताकि एकता का संदेश दिया जा सके. इस कवायद के बीच ममता बनर्जी का इस कार्यक्रम से दूरी बना लेना कांग्रेस के लिए किसी झटके के कम नहीं. पार्टी की ओर जारी बयान में कहा गया है कि ममता इस दिन दार्जिलिंग और उसके आसपास के इलाके के दौरे पर रहेंगी.

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13 मार्च को डिनर पार्टी

बता दें कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने सभी विपक्षी दलों के नेताओं को13 मार्च को रात्रिभोज पर आमंत्रित किया है जिसे भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करने के ताजा प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि संसद में सरकार पर हमला बोलने के लिए विपक्षी दलों द्वारा हाथ मिलाये जाने की पृष्ठभूमि में यह पहल विपक्ष को मजबूत करने और 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए संयुक्त मोर्चे की नींव रखने की दिशा में एक कदम है.

सोनिया गांधी ने यह पहल ऐसे समय में की है जबकि गैर भाजपा, गैर कांग्रेस मोर्चा की संभावनाओं को लेकर चर्चा हो रही है. इससे पहले टीआरएस प्रमुख और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चन्द्रशेखर राव ने इस मामले में राष्ट्रीय स्तर पर विचार विमर्श करने का प्रस्ताव दिया था. कांग्रेस के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि सोनिया गांधी का रात्रिभोज उन सभी विपक्षी दलों को साथ लाने की कोशिश है जो संसद के भीतर और बाहर भाजपा का मुकाबला करेंगे.

सोनिया गांधी इस बात को लेकर इच्छुक थीं कि सभी शीर्ष विपक्षी नेता इसमें आएं जिसमें तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी भी शामिल हों. ममता ने तब भी इसकी पुष्टि नहीं की थी कि वे इसमें शामिल होंगी या नहीं. ममता ने राव और द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष एम के स्टालिन से संसद के भीतर और बाहर तालमेल के लिए बातचीत की थी.