पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की हड़ताल का मुद्दा राष्ट्रीय बन गया है. कई राज्यों के डॉक्टरों ने पश्चिम बंगाल के डॉक्टरों का समर्थन किया है. दिल्ली स्थिति एम्स और कई अन्य अहम संस्थाओं के डॉक्टर हड़ताल पर हैं. इस बीच, पश्चिम बंगाल में डॉक्टर पूरी तरह से एकजुट हैं. उनकी एकजुटता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और एक वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस के नेता की बेटी भी इस हड़ताल में शामिल हो गई हैं. Also Read - ममता विधानसभा चुनाव से पहले टीकाकरण कार्यक्रम का राजनीतिकरण करने का प्रयास कर रही हैं: कैलाश विजयवर्गीय

हड़ताल का समर्थन करने वाली कोलकाता के मेयर और ममता सरकार के मंत्री फरहाद हकीम की डॉक्टर बेटी शभा हकीम ने कहा है कि वह इस मामले में सरकार के रूख से शर्मिंदा हैं. दूसरी तरफ ममता बनर्जी के भाई कार्तिक के बेटे आबेश केपीसी मेडिकल कॉलेज से एनआरएस मेडिकल कॉलेज तक मार्च करने वाले जूनियर डॉक्टर्स में शामिल होकर राज्य सरकार को बैकफुट पर ला दिया है. Also Read - West Bengal Assembly Election: कांग्रेस का ममता बनर्जी को बड़ा ऑफर, कहा- पश्चिम बंगाल में मिलकर चुनाव लड़े TMC, बीजेपी से...

शभा हकीम ने तो एक फेसबुक पोस्ट लिखकर अपने पिता की सरकार को ही आड़े हाथों ले लिया. उन्होंने इस मामले में राज्य सरकार की ओर से कदम नहीं उठाए जाने की आलोचना की. ममता के भतीजे आबेश केपीसी मेडिकल कॉलेज के छात्र हैं जबकि शभा ने वहीं से एमबीबीएस किया है. फेसबुक पोस्ट में शभा ने लिखा कि एक तृणमूल समर्थक होने के नाते वह अपने नेताओं की चुप्पी को लेकर शर्मिंदा हैं. उन्होंने आगे लिखा है कि उन्हें शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का अधिकार है. हमारे पास अपने कार्यस्थल पर सुरक्षा हासिल करने का अधिकार है. Also Read - West Bengal Assembly Election 2021 News: ममता ने शुभेंदु के पिता को इस अहम पद से हटाया, भाजपा नेता के धुर विरोधी को मिली जिम्मेदारी

इधर. कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में दो जूनियर डॉक्टरों पर हमला होने और उनके गंभीर रूप से घायल होने के बाद पश्चिम बंगाल में जूनियर डॉक्टर पिछले मंगलवार से हड़ताल पर हैं. इन डॉक्टरों के समर्थन में शुक्रवार को देशभर के डॉक्टरों ने हड़ताल करने का फैसला किया है. चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े डॉक्टरों के सबसे बड़े संगठन भारतीय चिकित्सा संघ यानी आईएमए (IMA) ने भी डॉक्टरों को बंगाल की घटना को लेकर होने वाले प्रदर्शन में शामिल होने को कहा है. इस कारण दिल्ली में शुक्रवार को निजी और सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित रहीं. देशभर में बड़ी संख्या में डॉक्टरों ने कोलकाता में प्रदर्शन कर रहे अपने साथियों के साथ एकजुटता दिखाते हुए एक दिन का काम का बहिष्कार करने का फैसला किया है.