बंगाल में राज्यपाल ने भंग की विधानसभा, बिना इस्तीफा दिए भी ममता अब CM नहीं

4 मई को आए चुनाव नतीजों में BJP ने 207 सीटें जीती हैं. ऐसे में अब बंगाल में पहली बार BJP की सरकार बनने जा रही हैं. शुक्रवार को BJP विधायक दल की बैठक होनी है. इसमें CM के नाम का ऐलान किया जाएगा.

Written by: Anjali Karmakar
Updated: May 7, 2026, 11:49 PM IST

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा न देने पर अड़ी हुई हैं. राज्य में हिंसक घटनाएं भी बढ़ती जा रही हैं. इस बीच गुरुवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने विधानसभा भंग कर दी है. ऐसे में इस्तीफा न देने के बाद भी ममता बनर्जी मुख्यमंत्री नहीं रहेंगी. क्योंकि, विधानसभा भंग होने के बाद निवर्तमान सरकार का कोई अस्तित्व नहीं रह जाता. सदन के साथ-साथ पूरी कैबिनेट भी भंग हो जाती है. मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल 7 मई तक ही था. अगर विधानसभा भंग भी न होती, तो 7 मई के बाद पुराने विधायक, विधानसभा, कैबिनेट और मुख्यमंत्री वैलिड नहीं रहते.

4 मई को आए चुनाव नतीजों में BJP ने 207 सीटें जीती हैं. ऐसे में अब बंगाल में पहली बार BJP की सरकार बनने जा रही हैं. शुक्रवार को BJP विधायक दल की बैठक होनी है. इसमें CM के नाम का ऐलान किया जाएगा. इसके बाद 9 मई को BJP सरकार का गठन होगा. नए मुख्यमंत्री और कुछ चुनिंदा विधायक शपथ लेंगे. इसी दिन कैबिनेट की बैठक भी होगी. शपथ ग्रहण के लिए 9 मई को एक खास वजह से चुना गया है. इस दिन विश्वकवि रविंद्र नाथ टैगोर की 165वीं जयंती है.

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ममता ने इस्तीफा देने से कब और क्यों किया था इनकार?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने के एक दिन बाद 5 मई को ममता बनर्जी ने चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया. दीदी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था. ममता ने कहा, “हम हारे नहीं हैं. हराए गए हैं. मैं CM पद से इस्तीफा नहीं दूंगी. मैं हारी नहीं हूं. इसलिए इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं उठता. मैं राजभवन (गवर्नर हाउस) नहीं जाऊंगी.”

EC पर लगाए BJP से साठगांठ के आरोप
दीदी ने कहा, “BJP चुनाव आयोग के जरिए आधिकारिक तौर पर हमें हरा सकती है, लेकिन नैतिक रूप से हमने ही चुनाव जीता है. यह BJP और चुनाव आयोग के बीच साठगांठ का रिजल्ट है.” ममता ने ये भी आरोप लगाया कि BJP और चुनाव आयोग ने SIR के बहाने 100 सीटें लूटीं.

विधानसभा भंग करने को लेकर क्या कहता है संविधान?
चुनाव आयोग ने संविधान के प्रावधानों और रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के सेक्शन 15 के अनुसार नोटिफिकेशन जारी करके नई विधानसभा के विधायकों का चुनाव करा लिया है. नियम के हिसाब से विधानसभा भंग होने के बाद नए विधायकों को विनिंग सर्टिफिकेट दे दिए जाते हैं. एक बार सर्टिफिकेट बांट दिया जाए, तो पुराने विधायकों और मुख्यमंत्री कोई वैलिडिटी नहीं रहती. ऐसे में ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री बने रहने का कोई अधिकार नहीं है. अगर कानूनी भाषा में देखें तो वह ‘नॉन-एस्ट’ होगा. मतलब उनका कानूनी अस्तित्व ही नहीं रहेगा.

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चुनाव हारने के बाद CM के इस्तीफा देने का रूल क्या है?
भारत की लोकतांत्रिक परंपरा के मुताबिक, चुनाव हारने के बाद मौजूदा CM को राज्यपाल को अपना इस्तीफा देना पड़ता है. हालांकि, नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण तक पुराने मुख्यमंत्री कार्यवाहक बने रहते हैं. लेकिन, अगर मौजूदा CM राज्यपाल को इस्तीफा देने से इनकार करते या करती हैं, तो भी नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण कराया जा सकता है. इसके लिए बस पुरानी विधानसभा को भंग करना पड़ता है.

इसके बाद भी ममता बनर्जी ने इस्तीफा न देने का दांव क्यों चला?
ममता ने ये कदम संवैधानिक कम, राजनीतिक वजहों से ज्यादा उठाया है. TMC पहली बार इतनी बड़ी हार झेल रही है. हार के बाद पार्टी में भगदड़, दलबदल और स्थानीय नेताओं के BJP की ओर जाने का खतरा रहता है. ममता ने इस्तीफा न देने का दांव BJP की सरकार के गठन में देरी और जनता के सामने विक्टिम कार्ड खेलने के लिए चला था. अगर वे तुरंत इस्तीफा देतीं, तो अप्रत्यक्ष रूप से हार स्वीकार करने जैसा संदेश जाता. अभी वे नैरेटिव बना रही हैं कि जनता ने नहीं, सिस्टम ने हराया. ताकि, भविष्य में उनके पास कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ने का बेस तैयार हो जाए.

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क्या इस ज़िद से वाकई फायदा होता?
बंगाल के राजनीतिक इतिहास को उठाकर देखें, तो यहां ‘आंदोलनकारी छवि’ बहुत असरदार रही है. ममता बनर्जी खुद लेफ्ट के खिलाफ आंदोलन और धरने से चमकी थीं. वहीं, विपक्षी गठबंधन INDIA में ममता को एक मजबूत नेता के तौर पर देखा जाता है. इस जिद के जरिए ममता अपने नेशनल पॉलिटिक्स में एंट्री की उम्मीदों को भी जिंदा रखना चाहती होंगी.

कैसा रहा बंगाल का रिजल्ट?
पश्चिम बंगाल समेत 5 राज्यों (तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी) के विधानसभा चुनाव के नतीजे सोमवार को आए. बंगाल में BJP ने 293 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज की है और पहली बार राज्य में सरकार बनाने जा रही है. बंगाल की फालता सीट पर 21 मई को दोबारा वोटिंग होनी है. इस चुनाव में TMC सिर्फ 80 सीटें जीत सकी. इस तरह 15 साल बाद ममता बनर्जी के हाथ सत्ता चली गई है. यही नहीं, ममता बनर्जी भबानीपुर सीट से भी हार गई हैं. यहां से सुवेंदु अधिकारी जीते हैं. वो नंदीग्राम से भी जीत चुके हैं.

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