पश्चिम बंगाल सरकार ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की, कूचबिहार से प्रस्तावित ‘रथ यात्रा’ को अनुमति देने से यह कहते हुए इंकार कर दिया है कि इससे सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो सकता है. राज्य के महाधिवक्ता ने गुरुवार को कलकत्ता हाईकोर्ट को यह जानकारी दी. किशोर दत्ता ने अदालत को बताया कि कूचबिहार के पुलिस अधीक्षक ने शुक्रवार से भाजपा अध्यक्ष की प्रस्तावित रथ यात्रा को अनुमति देने से इंकार कर दिया है.

राज्य ने कहा है कि इस यात्रा से सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो सकता है. इस पर न्यायाधीश ने पूछा कि अगर कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? जवाब में भाजपा के वकील अनिंद्य मित्रा ने कहा कि कानून और व्यवस्था को बनाये रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. अनुमति से इंकार का विरोध करने वाले भाजपा के पूरक हलफनामे का विरोध करते हुए महाधिवक्ता ने कहा कि या तो एक नई याचिका दायर की जा सकती है या इसी याचिका में संशोधन किया जा सकता है.

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यह पहला मौका नहीं है जब भाजपा ने राज्य में इस तरह की शिकायत को ले कर अदालत का रुख किया है. भाजप ने अदालत में दावा किया कि उसने तीन रैलियों के लिए इजाजत मांगी थी, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला. भाजपा की योजना सात दिसंबर को उत्तर में कूचबिहार से, नौ दिसंबर को दक्षिण 24 परगना के काकद्वीप से, और 14 दिसंबर को बीरभूक के तारापीठ मंदिर से रैली निकालने की है. महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक या गृह सचिव रैलियों के लिए इजाजत देने वाले सक्षम प्राधिकार नहीं हैं और एक राजनीतिक पार्टी होने के नाते याचिकाकर्ता (भाजपा) को यह बात जाननी चाहिए.

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उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को यह पता होना चाहिए कि उसे इसके लिए किसे आवेदन भेजना है. इसपर भाजपा के वकील ने कहा कि उन्होंने उन जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भी आवेदन किय है जहां से तीन ‘‘रथ यात्राएं’’ गुजरेंगी. भाजपा की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अनिंदय मित्रा ने कहा था कि 29 अक्टूबर को डीजी-आईजीपी को आवेदन किया गया था और फिर 14 नवंबर को गृह सचिव को आवेदनपत्र भेजे गए.

उन्होंने कहा कि बाद की तारीखों में इन अधिकारियों को स्मरणपत्र भेजे गए, लेकिन भाजपा को कोई जवाब नहीं मिला. मित्रा ने अदालत को बताया कि राज्यपाल केएन त्रिपाठी ने भी आवेदन पत्रों पर विचार करने के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखे.इस पर महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने कहा कि राज्यपाल एक संवैधानिक प्राधिकार हैं और इस तरह के उच्च पद पर आसीन किसी व्यक्ति को किसी राजनीतिक दल के आवेदन के बारे में इस तरह का आग्रह करना उचित नहीं है.

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न्यायमूर्ति चक्रवर्ती ने कहा कि पुलिस महानिदेशक और पुलिस महानिरीक्षक जिम्मेदार अधिकारी हैं और उन्हें आवेदनकर्ताओं को बताना चाहिए था कि वे सक्षम प्राधिकारी नहीं हैं.महाधिवक्ता ने कहा कि तीन यात्राएं 41 दिन में पूरी होनी हैं और यह राज्य के सभी जिलों से हो कर गुजरेंगी. इसके सुरक्षा पहलुओं का फैसला एक दिन के अंदर नहीं किया जा सकता.

(इनपुट-भाषा)