नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में पिछले एक सप्ताह से चल रही हड़ताल के बाद ममता बनर्जी ने डॉक्टर्स की कई मांगें मान ली हैं. जूनियर डॉक्टर्स के साथ ममता बनर्जी ने कैमरों के सामने बातचीत की. इसके बाद ममता बनर्जी ने जूनियर डॉक्टर्स की मांगें मानते हुए सरकारी अस्पतालों में शिकायत निवारण प्रकोष्ठ बनाने की मांग की मान ली. इसके साथ ही जूनियर डॉक्टर्स की मांग थी कि हर सरकारी अस्पताल में नोडल पुलिस अधिकारी की तैनाती की जाए, इस मांग पर भी ममता बनर्जी ने ऐसा करने के लिए कोलकाता पुलिस कमिश्नर को निर्देश दे दिए हैं.

मांगें माने जाने के बाद डॉक्टर्स ने हड़ताल ख़त्म करने का एलान कर दिया. इसका मतलब ये है कि पिछले सात दिनों से चल रही डॉक्टर्स की हड़ताल पर विराम लग गया है. डॉक्टर्स अब काम पर लौटेंगे. ये तब हुआ जब लाइव कवरेज की बैठक में ममता बनर्जी ने डॉक्टर्स की अन्य मांगें भी मान ली. इसके बाद डॉक्टर्स हड़ताल ख़त्म करने पर राजी हो गए. डॉक्टर्स ममता बनर्जी से बातचीत के बाद संतुष्ट और हड़ताल खत्म करने की घोषणा की.

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बता दें कि अस्पताल में मारपीट किए जाने के बाद पश्चिम बंगाल के डॉक्टर्स अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए थे. पश्चिम बंगाल के भड़का डॉक्टर्स का गुस्सा पूरे देश में फ़ैल गया. डॉक्टर्स का कहना था कि ममता बनर्जी पहले माफ़ी मांगें इसके बाद बात होगी. इसके बाद ममता बनर्जी ने डॉक्टर्स से बातचीत करने का प्रपोज़ल भी ठुकरा दिया था. आज सीएम ममता बनर्जी ने प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों के साथ प्रस्तावित बैठक के सीधे प्रसारण (लाइव कवरेज) के लिए सहमति दी. इससे हफ्ते भर से जारी गतिरोध सुलझने का रास्ता साफ हो गया. पहले राज्य सरकार ने बैठक के सीधे प्रसारण की हड़ताली डॉक्टरों की मांग ठुकरा दी थी. इसके लिए हर मेडिकल कॉलेज से दो-दो प्रतिनिधि सीएम से बातचीत करने आए. इन डॉक्टरों को राज्य सरकार की बसों में राज्य सचिवालय लाया गया. यह बैठक हावड़ा में राज्य सचिवालय से सटे एक सभागार में हो रही थी.

करीब एक सप्ताह पहले एनआरएस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कार्यरत अपने दो सहकर्मियों पर हुए हमले के विरोध में हड़ताल पर हैं. आरोप है कि दोनों जूनियर डॉक्टरों पर एक मरीज के परिजन ने हमला किया था. उस मरीज की पिछले सप्ताह मौत हो गई थी.