नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. कोलकाता पुलिस कमिश्नर से सीबीआई द्वारा पूछताछ करने की कोशिश के बाद धरने पर बैठीं ममता बनर्जी ने कहा कि वह अपनी जान देने तैयार हैं, लेकिन किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करूंगी. ममता ने कहा कि ‘मैंने तब कोई एक्शन नहीं लिया, मैं तब सड़कों पर नहीं आई जब टीएमसी के कार्यकर्ताओं को परेशान किया गया. लेकिन अब मैं गुस्से में हूं, क्योंकि उन्होंने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को बेइज्जत करने का प्रयास किया. कोलकाता पुलिस कमिश्नर पुलिस विभाग को लीड करते हैं.’

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रविवार रात को धरने पर बैठीं ममता बनर्जी के तेवर वैसे ही बने हुए हैं. वह केंद्र की मोदी सरकार पर हमलावर हैं. उनका कहना है कि वह किसी जांच एजेंसी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन मोदी सरकार सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है. मेरा विरोध इसी बात का है. बता दें कि रविवार शाम सीबीआई द्वारा पुलिस कमिश्नर से पूछताछ की कोशिश और हिरासत में लिए जाने के बाद शुरू हुआ बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. पुलिस कमिश्नर से पूछताछ करने पहुंची सीबीआई को हिरासत में ले लिया गया था. ममता बनर्जी पुलिस कमिश्नर से मीटिंग करने पहुंचीं. इसके बाद पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं. बीजेपी व केंद्र सरकार के खिलाफ तानाशाही का आरोप लगाते हुए वह धरने पर बैठी हैं. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का अत्याचार बहुत बर्दाश्त किया, अब ऐसा नहीं होगा.

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ममता के धरने पर बैठते ही सीबीआई अफसरों को छोड़ दिया गया. पुलिस ने टीम को सीबीआई के रीजनल ऑफिस के बाहर छोड़ा है. इसके साथ ही सीबीआई के रीजनल ऑफिस के बाहर सीआरपीएफ भी तैनात कर दी गई. यहां बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई. इस मामले को लेकर सीबीआई सुप्रीम कोर्ट गई. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कोलकाता पुलिस कमिश्नर के खिलाफ सबूत लाने को कहा है. वहीं, ममता के धरने पर बैठते ही टीएमसी कार्यकर्ताओं ने पूरे बंगाल में प्रदर्शन शुरू कर दिया. आज बंगाल सरकार द्वारा बजट पेश किया जाना था, लेकिन नहीं किया गया. राहुल गाँधी सहित पूरे विपक्ष ने ममता को इस मामले को लेकर समर्थन किया है. उन्हें विपक्ष के सभी बड़े नेता फ़ोन पर समर्थन के लिए फोन कर चुके हैं.

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ये है चिटफंड घोटाला
सीबीआई चिटफंड मामले में पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ के लिए पहुंची थी. इस मामले की जांच राजीव कुमार ने ही की थी. उन पर आरोप है कि उन्होंने जाँच ठीक ढंग से नहीं की और आरोपियों को फायदा पहुंचाया. पश्चिम बंगाल का चर्चित चिटफंड घोटाला 2013 में सामने आया था. कथित तौर पर तीन हजार करोड के इस घोटाले का खुलासा अप्रैल 2013 में हुआ था. आरोप है कि शारदा ग्रुप की कंपनियों ने गलत तरीके से निवेशकों के पैसे जुटाए और उन्हें वापस नहीं किया. इसके बाद इस घोटाले को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर सवाल उठे थे. चिट फंड एक्ट-1982 के मुताबिक चिट फंड स्कीम का मतलब होता है कि कोई शख्स या लोगों का समूह एक साथ समझौता करे. इस समझौते में एक निश्चित रकम या कोई चीज एक तय वक्त पर किश्तों में जमा की जाए और तय वक्त पर उसकी नीलामी की जाए.जो फायदा हो बाकी लोगों में बांट दिया जाए. इसमें बोली लगाने वाले शख्स को पैसे लौटाने भी होते हैं.