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कोलकाता, 26 नवंबर | पश्चिम बंगाल के परिवहन मंत्री मदन मित्रा ने बुधवार को सरकार द्वारा संचालित एसएसकेएम अस्पाल से छुट्टी पाने के बाद कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) यदि सम्मन भेजती है, तो वह पूछताछ के लिए हाजिर होने को तैयार हैं। सीबीआई ने करोड़ों रुपयों के शारदा चिटफंड घोटाला मामले में पूछताछ के लिए मित्रा को सम्मन भेजा था लेकिन स्वास्थ्य कारणों से वह पूछताछ के लिए हाजिर नहीं हो पाए थे। Also Read - लंदन की अदालत में नीरव मोदी की जमानत याचिका लगातार सातवीं बार खारिज : सीबीआई

मित्रा पहले तो 18 नवंबर को एक निजी अस्पताल में भर्ती हुए थे, लेकिन 20 नवंबर को सांस की तकलीफ की शिकायत के बाद एसएसकेएम में भर्ती हो गए थे, जहां चिकित्सकों के एक दल ने जांच के बाद उन्हें पूरी तरह स्वस्थ पाकर छुट्टी दे दी। अस्पताल से घर आने के बाद मित्रा ने कहा, “सीबीआई जब भी मुझे बुलाएगी, मैं जाऊंगा और उनके सवालों का जवाब दूंगा। मैंने या मेरी पार्टी (तृणमूल कांग्रेस) ने कभी यह नहीं कहा है कि हम सीबीआई के साथ सहयोग नहीं करेंगे।” Also Read - बंगाल: दुर्गा पंडाल में दिखा 'असुर जिनपिंग' का सिर, लोग बोले- मां दुर्गा के हाथों कोरोना वायरस का खात्मा किया

उन्होंने आगे कहा, “ऐसा न होता, तो श्यामपद मुखर्जी (कपड़ा मंत्री) और सांसद मिथुन चक्रवर्ती या अर्पिता घोष जैसे पार्टी नेता सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय (इडी) के समक्ष पूछताछ के लिए हाजिर न होते।” सीबीआई और ईडी ने शारदा चिटफंड मामले की जांच के दौरान तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं से पूछताछ की है और कई को गिरफ्तार भी किया है, जनमें कई सांसद शामिल हैं।

मित्रा ने कहा, “सीबीआई ने मुझे 21 नवंबर को बुलाया था, लेकिन मैं बीमार था और पूछताछ के लिए नहीं जा सका था। आज (बुधवार) मैं थोड़ा बेहतर महसूस कर रहा हूं। वास्तव में मैंने ही चिकित्सक दल से कहा कि मैं ठीक महसूस कर रहा हूं और आप चाहें तो मुझे छुट्टी दे सकते हैं।” सीबीआई मामले के संबंध में मित्रा के करीबी सहयोगी बापी करीम से पहले ही पूछताछ कर चुकी है।

कहा जा रहा है कि चिटफंट कंपनी के निदेशक मंडल में कथित रूप से शामिल मित्रा के बेटे स्वरूप को भी गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) के दायरे में लाया जा सकता है।  मित्रा ने शारदा घोटाला मामले में अपनी और अपने बेटे की संलिप्तता के आरोपों का खंडन करते हुए चेतावनी दी थी कि यदि उनका या उनके बेटे का नाम शारदा घोटाला या किसी चिटफंट कंपनी से जोड़ा गया, तो वह मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे।