नई दिल्ली: लोकसभा सीटों के लिहाज से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद तीसरा सबसे बड़ा राज्य पश्चिम बंगाल राजनीति का अखाड़ा बन गया है. बीजेपी और टीएमसी आमने-सामने हैं. रविवार शाम रोज वैली और शारदा पोंजी घोटाला मामले में कोलकाता पुलिस प्रमुख राजीव कुमार से पूछताछ करने के लिए सीबीआई कोलकाता पहुंची थी, लेकिन राज्य पुलिस ने एजेंसी के अफसरों को हिरासत में ले लिया. सीबीआई कुमार से लापता दस्तावेज और फाइलों के बारे में पूछताछ करना चाहती थी. इसके बाद चिटफंड घोटाले में सीबीआई के कोलकाता पुलिस प्रमुख से पूछताछ करने की कोशिश के खिलाफ ममता बनर्जी धरने पर बैठ गईं.

बीजेपी-टीएमसी आमने सामने
ममता बनर्जी की सरकार ने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की रथ यात्रा को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था. मामला हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन बीजेपी की रथ यात्रा को मंजूरी नहीं मिली. अमित शाह की रैली की लेकर भी हंगमा हुआ. राज्य सरकार ने उनके हेलिकॉप्टर को उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. हालांकि बाद में अमित शाह ने राज्य में रैली की. रविवार को उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के हेलिकॉप्टर को प्रशासन ने उतरने की अनुमति नहीं दी. इसके बाद योगी ने फोन के जरिए रैली को संबोधित किया.

बंगाल में कहां खड़ी है बीजेपी
2014 के लोकसभा चुनाव में जब कथित मोदी लहर अपने उफान पर थी, पश्चिम बंगाल में बीजेपी को सिर्फ दो सीटें मिली थीं. ममता बनर्जी की पार्टी को राज्य की 42 में से 34 सीटें मिली थीं. लोकसभा में टीएमसी चौथी सबसे बड़ी पार्टी बनी थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में सबकी निगाहें पश्चिम बंगाल पर टिकी हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में जब बीजेपी ने सबसे बड़ी जीत हासिल की थी उस समय पार्टी को बंगाल में 17 प्रतिशत वोट मिले थे. हालांकि यह बीजेपी का राज्य में अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन था. 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से बीजेपी का वोट शेयर बढ़ रहा है और वह राज्य में कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों को पीछे छोड़ रही है.

बीजेपी के सामने ममता से पार पाने की चुनौती
पश्चिम बंगाल पारंपरिक रूप से वामपंथी झुकाव वाला राज्य रहा है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अप्रैल 2017 में देशव्यापी दौरे की शुरुआत नक्सल आंदोलन के गढ़ नक्सलबाड़ी से किया तो वामपंथी नेताओं ने इसे बीजेपी आरएसएस द्वारा वामपंथी और अति-वाम विचारधारा के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत के रूप में देखा. लेफ्ट पार्टियों के जाने के बाद ममता की तृणमूल कांग्रेस को नया वामपंथी कहा जाने लगा है. राइट वर्सेस लेफ्ट की लड़ाई में पश्चिम बंगाल धुरी बन गया है. ममता बनर्जी यहां मजबूत स्थिति में हैं और वह विपक्षी पार्टियों की अगुवाई कर रही हैं. हाल ही में ममता बनर्जी की अगुवाई में 22 पार्टियों ने कोलकात में अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया था.

वोट शेयर बढ़ा, क्या बीजेपी की सीटें बढ़ेंगी?
पश्चिम बंगाल में ममता दीदी के सामने लड़ाई में कौन है. इस सवाल के जवाब में तृणमूल के आलोचकों का कहना है कि मई 2018 में हिंसक पंचायत चुनावों के बाद पार्टी के खिलाफ रोष पनप रहा है. इन चुनावों में टीएमसी ने 34% सीटें निर्विरोध जीतीं थीं. आरोप लगा कि ममता दीदी की पार्टी ने विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने और मतदाताओं को वोट देने से रोका. आलोचकों का कहना है कि इसका खामियाजा ममता दीदी को भुगतना पड़ेगा और वोट बीजेपी की ओर जा सकते हैं. हालांकि अन्य लोगों का कहना है कि यह देखने वाली बात होगी कि बीजेपी को मिलने वाले वोट सीटों में बदल पाते हैं कि नहीं. वहीं टीएमसी से छिटके वोट बीजेपी को मिलेंगे या लेफ्टा और कांग्रेस में बंट जाएंगे.