कोलकाता। एक लंबी कानूनी लड़ाई के बाद पश्चिम बंगाल में हुए बहुप्रतीक्षित पंचायत चुनाव के लिेए गुरुवार 17 मई को मतगणना होगी. सोमवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद भारी हिंसा के बीच चुनाव हुए थे जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई थी. अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले राज्य में हुआ पंचायत चुनाव अंतिम बड़ा चुनाव रहा. मुख्य मुकाबला सत्तारुढ़ टीएमसी और बीजेपी के बीच है. वामदल तीसरी शक्ति के रूप में मौजूद है. कुल 621 जिला परिषदों, 6,157 पंचायत समितियों और 31,827 ग्राम पंचायतों के लिए मतदान हुआ था.

एक चरण में हुए पंचायत चुनाव के लिए जबरदस्त प्रचार अभियान चला था. चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने के दौरान हुई हिंसा को लेकर राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस , भाजपा , कांग्रेस और वाममोर्चा के नेताओं ने एक दूसरे पर आरोप – प्रत्यारोप लगाए थे. इस बार पंचायत चुनाव में राज्य निर्वाचन आयोग , राज्य सरकार , सत्तारूढ़ टीएमसी और विपक्षी भाजपा , कांग्रेस तथा वाममोर्चा के बीच एक अभूतपूर्व कानूनी लड़ाई देखने को मिली थी.

पश्चिम बंगाल में 68 प्रतिशत पुनर्मतदान हुआ

वहीं 16 मई को समूचे पश्चिम बंगाल के जिलों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 572 मतदान केन्द्रों पर पुनर्मतदान कमोबेश शांतिपूर्ण रहा और करीब 68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. राज्य निर्वाचन आयोग ( एसईसी ) ने आज यह जानकारी दी.
इन मतदान केन्द्रों पर सोमवार को हुये पंचायत चुनावों के दौरान व्यापक हिंसा की शिकायतें मिली थीं जिसके बाद यहां मतदान कराया गया. हिंसा में 12 लोग मारे गये थे.

केंद्र ने हिंसा पर मांगी दूसरी रिपोर्ट

केंद्र ने पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव में हिंसा के ब्यौरे को अधूरा बताया और प्रदेश सरकार से दूसरी रिपोर्ट भेजने को कहा. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. राज्य में सोमवार को हुए चुनाव में भारी हिंसा के बाद रिपोर्ट भेजने को कहा गया था. उसके दो दिन बाद यह संदेश भेजा गया है. चुनावी हिंसा में एक दर्जन से ज्यादा लोग मारे गए थे.

एक अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल सरकार से कहा है कि वह चुनावी हिंसा के बारे में विस्तृत रिपोर्ट भेजे क्योंकि राज्य द्वारा भेजी गयी पहली रिपोर्ट अधूरी है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार से उन परिस्थिति के बारे में ब्यौरा मांगा गया था जिनमें हिंसा हुयी. इसके साथ ही शांति बहाल करने तथा हिंसा में शामिल लोगों को दंडित करने के लिए उठाए गए कदमों का ब्यौरा देने को भी कहा गया है. प्रदेश में पंचायत चुनाव के दौरान 60 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे.