
Anjali Karmakar
अंजलि कर्मकार 12 साल से जर्नलिज्म की फील्ड में एक्टिव हैं. उन्होंने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया है. यहीं से मास कॉम में मास्टर्स की डिग्री ली ... और पढ़ें
पश्चिम बंगाल का विधानसभा चुनाव हारने के बाद लगता है कि ममता बनर्जी की किस्मत भी रूठ गई है. पहले भतीजे अभिषेक बनर्जी पर अटैक हुआ. अब ममता की TMC में भी फूट पड़ चुकी है. सोमवार को पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उनके साथ पार्टी के 60 विधायक हैं. इन सभी ने बुधवार को विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मिलकर ऋतब्रत को विधायक दल का नेता घोषित करने के लिए समर्थन पत्र सौंपा है. स्पीकर ने भी ऋतब्रत के गुट को मान्यता दे दी है.
रिपोर्ट के मुताबिक, जावेद खान, संदीपन साहा और सिउली साहा को उपनेता बनाया गया है. वहीं, अखरुज्जमान को चीफ व्हिप बनाया गया है. हालांकि, बागी गुट ने अपने पत्र में ममता बनर्जी को अब भी पार्टी अध्यक्ष बताया है. इस बगावत के बीच ममता बनर्जी ने बुधवार को राज्य की सभी कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है. पार्टी अब पूरे संगठन का पुनर्गठन करेगी.
खेला हुआ, अब वक्त आने पर बड़ा खेल खेलूंगी… भतीजे अभिषेक पर हमले के बाद ममता बनर्जी की BJP को चुनौती
पार्टी से क्यों निकाले गए संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी?
ममता बनर्जी ने TMC से 2 विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी को पार्टी से निकाल दिया था. दोनों ने स्पीकर से शिकायत की थी कि पार्टी ने शोभनदेव को नेता विपक्ष बनाने वाले प्रस्ताव में उनके उनके फर्जी साइन किए थे. साहा और बनर्जी का आरोप है कि यह शिकायत करने पर ही दोनों TMC से निकाले गए. इसके बाद ही TMC में फूट पड़ने लगी थी. कुल 80 में से 60 विधायक शोभनदेव के खिलाफ थे. उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता बताया था.
कैसे बनी TMC?
80 में 60 विधायक गायब, नेताओं की बगावत और CID की एंट्री… क्या ममता-अभिषेक पड़ रहे हैं अकेले?
पार्टी को बचाने के लिए क्या कर रहीं ममता?
क्या सत्ता में दोबारा लौट पाएगी TMC?
इसका जवाब ठीक-ठीक कहा नहीं दिया जा सकता. लेकिन, गुंजाइश बहुत कम है. पश्चिम बंगाल के इतिहास में झांककर देखें, तो ऐसा होता दिख नहीं रहा. 1977 तक बंगाल में कांग्रेस 25 साल शासन में रही. बीच में 1967 से 1972 तक यूनाइटेड फ्रंट भी सत्ता में आई. इसके बाद 34 साल तक लेफ्ट फ्रंट की सरकार चली. 2011 में ममता बनर्जी ने लेफ्ट के शासन पर फुल स्टॉप लगाया. वो 2011 से 2026 तक बंगाल की सत्ता में काबिज रहीं. इसी पैटर्न को फॉलो करें, तो अब BJP भी लंबे समय तक बंगाल में रहेगी.
अब आगे क्या?
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