नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया का वेस्टर्न सिडनी विश्वविद्यालय (डब्ल्यूएसयू) 2022 तक भारतीय किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य पाने में मदद के लिए 50 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर निवेश करने की योजना बना रहा है. विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी. ये राशि भारतीय मुद्रा में 2 अरब 58 करोड़ 91 लाख 50 हजार रुपए है. विश्वविद्यालय की योजना किसानों की आय बढ़ाने में शोध एवं नवाचार का लाभ उठाने के लिए देश के विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के साथ करार करने की है.

किसानों के लिए खुशखबरी, मोदी सरकार ले सकती है ये बड़ा फैसला

वेस्टर्न सिडनी विश्वविद्यालय के कुलपति बार्नी ग्लोवर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले पांच साल में भारतीय किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया है. हालांकि, इस लक्ष्य को पाने में नवाचार एवं विकास की जरूरत होगी और किसानों की जमीनी समस्याओं को दूर करना होगा. उन्होंने कहा कि डब्ल्सूएसयू ने पर्यावरण में बदलाव के कारण उपस्थित वैश्विक खाद्य संकट से निपटने की योजना के तहत भारतीय कृषि शोध परिषद (आईसीएआर) एवं 13 कृषि विश्वविद्यालयों से हाथ मिलाया है.

किसान संगठनों से सरकार की बातचीत: 11 में से 7 मुद्दों पर बनी बात लेकिन संतुष्‍ट नहीं किसान

कुलपति बार्नी ग्लोवर ने कहा कि डब्ल्यूएसयू नए शोध एवं विकास का फायदा उठाने के लिए पचास लाख डॉलर निवेश करने की योजना बना रहा है. इससे दीर्घकालीन अवधि में किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा.

किसानों-मजदूरों की क्या है मांग, आखिर क्या कहती है स्वामीनाथ कमेटी की रिपोर्ट?

ग्लोवर ने नई दिल्‍ली में एक इंटरव्‍यू में कहा, ”भारत और ऑस्ट्रेलिया के समक्ष संरक्षित फसल उद्योग तैयार करने में एक समान चुनौतियां हैं. अत: हमारे पास शोध के सवाल भी एक जैसे हैं.” उन्होंने कहा कि दोनों देशों का मौसम एक जैसा है. हमारे पास मानसून क्षेत्र हैं, बेहद सूखे क्षेत्र हैं.कई मायनों में वृहद कृषि के मामले में हमारी चुनौतियां एक जैसी हैं. हालांकि, ग्लोवर ने कहा कि भारत के पास कुछ अतिरिक्त जटिलताएं भी हैं.

इन 15 मांगों के लिए अड़े हैं किसान, ये है स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश

ग्लोवर ने कहा, ”99 प्रतिशत भारतीय किसानों के पास पांच हेक्टेयर से भी कम खेत हैं.” उन्होंने कहा कि विशेषकर छोटे किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सुझाव तैयार करने पर पुणे में काम चल रहा है. ये वैसे किसान हैं, जिनके पास एक हेक्टेयर से भी कम खेत है और जो जीने लायक कमाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मधुमक्खियों को लेकर भी आईसीएआर के साथ काम जारी है.