क्या है देवघर घोटाला? जिसमें लालू यादव के सजा निलंबन के खिलाफ CBI पहुंची सुप्रीम कोर्ट, जानें आज सुनवाई में क्या-क्या हुआ

Deoghar Treasury Scam: सुप्रीम कोर्ट ने देवघर कोषागार घोटाले में लालू यादव की जमानत को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई 22 अप्रैल 2026 तक टाल दी है. कोर्ट ने आरोपियों की अधिक आयु और कुछ की मृत्यु का हवाला देते हुए डॉक्यूमेंट्स को पूरा करने का निर्देश दिया है. बता दें कि यह मामला 1991-94 के बीच देवघर से 89 लाख रुपये की अवैध निकासी से जुड़ा है.

Published date india.com Published: February 17, 2026 7:00 PM IST
Supreme court, lalu yadav
सुप्रीम कोर्ट में CBI की याचिका पर सुनवाई टली, देवघर घोटाले में लालू यादव के खिलाफ की ये मांग

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के खिलाफ चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सीबीआई (CBI) ने झारखंड हाई कोर्ट द्वारा लालू यादव की सजा निलंबन और जमानत को चुनौती दी है. यह मामला झारखंड के प्रसिद्ध शिव मंदिर देवघर का है, जो झारखंड बनने से पहले बिहार का हिस्सा था.

सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने मामले की सुनवाई को 22 अप्रैल तक के लिए टाल दिया है. कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले में कई आरोपी 60, 70 और 80 वर्ष की आयु के हैं. कोर्ट ने यह भी नोट किया कि कुछ आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है और अभी तक सभी पक्षों की ओर से जवाब दाखिल नहीं किए गए हैं.

सीबीआई की ओर से पेश एएसजी एस.वी. राजू ने तर्क दिया कि कानून को गलत तरीके से लागू कर सजा को निलंबित किया गया है, जबकि लालू यादव के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अभी कई प्रतिवादियों को नोटिस नहीं मिला है.

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क्या है देवघर कोषागार घोटाला?

देवघर घोटाला, चारा घोटाले का ही एक हिस्सा है, जो साल 1991 से 1994 के बीच हुआ था. इसमें देवघर कोषागार से अवैध रूप से 89 लाख रुपये की निकासी की गई थी. उस समय लालू प्रसाद यादव बिहार के मुख्यमंत्री थे और पशुपालन विभाग का प्रभार भी उन्हीं के पास था. सीबीआई का आरोप है कि लालू यादव को इस गबन की पूरी जानकारी थी.

घटना की पूरी टाइमलाइन

  • 1991-1994: देवघर कोषागार से 89 लाख रुपये की फर्जी निकासी की गई,
  • 1996: चारा घोटाले का खुलासा हुआ और जांच शुरू हुई,
  • दिसंबर 2017: रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने लालू यादव को इस मामले में दोषी ठहराया और 3.5 साल की जेल की सजा सुनाई,
  • जुलाई 2019: झारखंड हाई कोर्ट ने लालू यादव की आधी सजा काटने के आधार पर उन्हें जमानत दे दी और सजा निलंबित कर दी,
  • जुलाई 2023: हाई कोर्ट ने सीबीआई की उस याचिका को स्वीकार किया जिसमें लालू यादव की सजा की अवधि बढ़ाने की मांग की गई थी,
  • फरवरी 2026 (आज): सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील पर सुनवाई करते हुए मामले को अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दिया,

राउज एवेन्यू कोर्ट में लैंड फॉर जॉब केस

लालू यादव और उनके परिवार के लिए कानूनी मुश्किलें केवल चारा घोटाले तक सीमित नहीं हैं. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में लैंड फॉर जॉब (जमीन के बदले नौकरी) मामले की भी सुनवाई चल रही है. यह मामला उस समय का है जब लालू यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे. इस मामले में तत्कालीन रेल मंत्री लालू यादव आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी की नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों से जमीन ली गई थी.

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