नई दिल्ली: दिल्ली में 70 विधानसभा सीटों (Delhi Assembly Election 2020) पर आज मतदान हो गया है. दिल्ली में करीब 60 प्रतिशत मतदान हुआ है. मतदान के तुरंत बाद एग्ज़िट पोल (Exit Poll) में भी आ गए. अधिकतर एग्ज़िट पोल में अनुमान लगाया गया है कि दिल्ली में एक बार फिर आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) की सरकार होगी. अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) दिल्ली के सीएम बनेंगे. चुनाव के बाद अक्सर एग्ज़िट पोल सामने आते हैं. हम अपने रीडर्स को बता रहे हैं कि एग्ज़िट पोल आखिर होता क्या है. एग्ज़िट पोल कैसे होता है. Also Read - Bihar Exit Poll: तेजस्वी यादव बिहार सीएम के लिए सबसे लोकप्रिय विकल्प, महागठबंधन को प्रचंड जीत के आसार

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एग्ज़िट पोल चुनावी सर्वे का एक हिस्सा है. जब वोटर अपना वोट डालकर मतदान केंद्र से बाहर निकल रहा होता है तो उससे सवाल किया जाता है कि उसने किसे वोट दिया. इसी प्रक्रिया को व्यापक स्तर पर किया जाता है और बड़े स्तर पर जो नतीजे निकल कर आते हैं, वो एग्ज़िटपोल कहलाता है. एग्ज़िट पोल मतदान संपन्न होने के बाद दिखाया जाता है. Also Read - अरविंद केजरीवाल के शपथ ग्रहण में रहेंगे ‘दिल्ली निर्माण’ के लिए जिम्मेदार ये 50 लोग, कोई टीचर तो कोई है बस मार्शल

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क्यों करते हैं एग्ज़िट पोल?

एग्ज़िट पोल करने वाला व्यक्ति वोटर का डेमोग्राफिक डाटा इकट्ठा करता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने जिसे वोट किया उसके पीछे क्या फैक्टर्स थे. चूंकि लोगों द्वारा डाले गए वोट गोपनीय होते हैं. ऐसे में एग्ज़िट पोल ही एकमात्र रास्ता है, जिससे ये जानकारी इकट्ठा की जा सकती है. भारत में एग्ज़िट की शुरुआत करने का श्रेय इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक ओपिनियन के चीफ एरिक डी. कॉस्टा को जाता है. चुनाव के दौरान एग्ज़िट पोल की मदद से जनता के मिजाज को परखने वाले वे पहले व्यक्ति थे.

कैसे करते हैं एग्ज़िट पोल?
मतदान के दौरान अलग-अलग बूथों पर डाले जा रहे वोट एक समान नहीं होते और सुबह से शाम तक वोटिंग पैटर्न में बदलाव भी आते हैं. ऐसे में पूरे दिन में किया गया सिर्फ एक सर्वे गलत तस्वीर पेश कर सकता है. इसलिए एग्ज़िट पोल मुख्य रूप से स्विंग (उतार-चढ़ाव) और टर्नआउट कैलकुलेट करते हैं. सर्वे करने वाला व्यक्ति हर चुनाव में उसी बूथ पर वापस जाता है जिस बूथ पर वो हर बार जाता रहा है. वह उसी वक्त बूथ पर जाता है जिस वक्त वह पिछली बार गया था. इसके बाद जुटाए गए आंकड़ों की तुलना पिछले एग्ज़िट पोल से की जाती है. फिर ये कैलकुलेट किया जाता है कि विधानसभा क्षेत्र में वोटों के बंटवारे में कैसे उतार-चढ़ाव आए. इस उतार-चढ़ाव को उसी तरह के दूसरे विधानसभा क्षेत्र में अप्लाई किया जाता है और फिर जो नतीजे निकल कर आते हैं उन्हें एग्ज़िट पोल में दिखाया जाता है.

एग्ज़िट पोल और ओपिनियन पोल में अंतर

एग्ज़िट पोल में वोटर से मतदान करने के तुरंत बाद पूछा जाता है कि उसने किसे वोट किया. वहीं, ओपिनियन पोल इससे बिलकुल अलग होता है. इस सर्वे में वोटर से पूछा जाता है कि वे किसे अपना वोट देने का मन बना रहे हैं.