क्या है गुलियेन-बैरे सिंड्रोम बीमारी, पुणे में 64 केस, 13 मरीज वेंटिलेटर पर और एक की मौत

Guillain Barre syndrome: इस बीमारी का इलाज काफी महंगा है. 20 हजार के कई इंजेक्शन इसमें लगते हैं. पुणे नगर आयुक्त डॉ राजेंद्र भोसले ने कहा, हम GBS से प्रभावित मरीजों को मुफ्त इलाज देंगे.

Published date india.com Updated: January 27, 2025 1:46 PM IST
क्या है गुलियेन-बैरे सिंड्रोम बीमारी, पुणे में 64 केस, 13 मरीज वेंटिलेटर पर और एक की मौत

Guillain Barre syndrome: गुलियन-बैरे सिंड्रोम के अब तक पुणे में 64 से ज्यादा संदिग्ध केस पाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक एक मरीज की मौत हुई है और 13 मरीज वेंटिलेटर पर है. इसके बाद स्‍वास्‍थ्‍य विभाग समेत पूरे महाराष्ट्र में लोग डरे हुए हैं. आइए जानते हैं क्या है गुलियन-बैरे सिंड्रोम, इसके बीमारी के क्या हैं लक्षण.

क्या है गुलियन-बैरे सिंड्रोम

गिलियन-बैरे सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली तंत्रिकाओं पर हमला करती है. यह कमजोरी, सुन्नता या पक्षाघात का कारण बन सकता है.

गुलियन-बैरे सिंड्रोम के लक्षण

हाथों और पैरों में कमजोरी और झुनझुनी आमतौर पर पहले लक्षण होते हैं. ये संवेदनाएं जल्दी फैल सकती हैं और पक्षाघात का कारण बन सकती हैं. अधिकांश लोगों को अस्पताल में इलाज की आवश्यकता होती है. गिलियन-बैरे सिंड्रोम दुर्लभ है और इसका सटीक कारण ज्ञात नहीं है.

अब तक क्या पता चला

एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक पुणे नगर निगम (पीएमसी) आयुक्त के एक अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र के पुणे जिले में गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) के 64 मामले सामने आए हैं. पाए गए सभी मामलों में से करीब 13 मरीज वेंटिलेटर पर हैं, जबकि पांच मरीज ठीक होने के बाद डिस्चार्ज हो चुके हैं. कमला नेहरू अस्पताल में पीएमसी ने 15 आईसीयू बेड की पहचान की है, जहां हम जीबीएस से प्रभावित मरीजों को मुफ्त इलाज देंगे.

अधिकारी ने आगे बताया कि पीएमसी की टीमें अलग-अलग स्रोतों से पानी की जांच कर रही हैं. निवासियों को पानी उबालकर पीने के लिए कहा गया है. खाने से पहले भोजन गर्म करने की भी सलाह दी गई है. वहीं पुणे नगर आयुक्त डॉ राजेंद्र भोसले ने इस बीमारी के शिकार लोगों को मुफ्त इलाज देने की बात कही है क्योंकि इसका इलाज काफी महंगा है.

टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, 9 जनवरी को अस्पताल में भर्ती एक मरीज को पुणे के भीतर पहला GBS मामला होने का संदेह हुआ. मरीजों से लिए गए कुछ जैविक नमूनों में कैम्पिलोबैक्टर जेजुनी बैक्टीरिया का पता चला है. यह बैक्टीरिया जीबीएस के लगभग एक तिहाई मामलों का कारण बनता है.

Add India.com as a Preferred SourceAdd India.com as a Preferred Source

Also Read:

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें Health की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.