क्या है मूनलाइटिंग? जिसकी वजह से भारतीय मूल के शख्स को अमेरिका में दिया गया 15 साल का कारावास

What is Moonlighting: न्यूयॉर्क स्टेट इंस्पेक्टर जनरल लूसी लैंग के अनुसार, 'सरकारी कर्मचारियों पर ईमानदारी से सेवा करने का भरोसा होता है और गोस्वामी का कथित आचरण उस भरोसे का गंभीर उल्लंघन है.'

Published date india.com Published: October 24, 2025 3:30 PM IST
क्या है मूनलाइटिंग? जिसकी वजह से भारतीय मूल के शख्स को अमेरिका में दिया गया 15 साल का कारावास

What Is Moonlighting: अमेरिका में बीते गुरुवार एक भारतीय मूल के ट्रक ड्राइवर ने नशे की हालत में 3 लोगों को रौंदकर उनकी जान ले ली. सड़क हादसे का भयानक वीडियो भी सामने आया था. अभी इस मामले को लेकर अमेरिका में हड़कंप मचा ही था कि अब एक नई खबर ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा है. मिली जानकारी के मुताबिक अमेरिका में रह रहे एक भारतीय मूल के शख्स को मूनलाइटिंग के आरोप में 15 साल कारावास की सजा सुनाई गई है. ‘मूनलाइटिंग’ कई लोगों के लिए नया शब्द हो सकता है, लेकिन अमेरिका जैसे देश में ये एक जाना-पहचाना अपराध है, जिसके लिए सजा पाए दोषी को जमानत मिलना भी मुश्किल हो जाता है. आइए जानते हैं क्या होता है मूनलाइटिंग जुर्म?

क्या है यह ‘मूनलाइटिंग’ का जुर्म?

‘मूनलाइटिंग’ (Moonlighting) का सीधा मतलब है एक साथ दो जगह नौकरी करना, खासकर तब जब आप अपनी मुख्य नौकरी से सैलरी ले रहे हों और अपनी दूसरी नौकरी को छिपा रहे हों. आमतौर पर यह शब्द शाम या रात के समय की गई अतिरिक्त नौकरी से आया है, लेकिन आजकल इसका इस्तेमाल मुख्य नौकरी की जानकारी और अनुमति के बिना दूसरी नौकरी या प्रोजेक्ट करने के लिए होता है. इस मामले में आरोपी मेहुल गोस्वामी न्यूयॉर्क स्टेट ऑफिस ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी सर्विसेज (ITS) में रिमोट वर्कर के तौर पर काम कर रहे थे, जबकि वह साथ ही पास के माल्टा शहर में एक और फुल-टाइम नौकरी कर रहे थे. उनपर मूनलाइटिंग के जरिए राज्य के फंड से $50,000 (करीब 4392500 रुपये) कमाने का आरोप लगा है.

क्यों जुर्म माना गया है मूनलाइटिंग?

न्यूयॉर्क स्टेट इंस्पेक्टर जनरल लूसी लैंग के अनुसार, ‘सरकारी कर्मचारियों पर ईमानदारी से सेवा करने का भरोसा होता है और गोस्वामी का कथित आचरण उस भरोसे का गंभीर उल्लंघन है.’ सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग करने के आरोप में उन पर ग्रैंड लैर्सनी (Grand Larceny) की सजा सुनाई गई है. खबरों के मुताबिक, न्यूयॉर्क के नए नियमों के तहत यह अपराध गैर-जमानती है. जहां अमेरिका में इसे एक गंभीर अपराध माना जाता है, वहीं भारत में, खासकर आईटी सेक्टर में, मूनलाइटिंग का चलन तेजी से बढ़ा है. इसकी वजहों की बात करें तो कम सैलरी, वर्क फ्रॉम होम की सुविधा और पैसों की जरूरत मुख्य कारण हो सकते हैं.

कंपनियां क्यों हैं मूनलाइटिंग के खिलाफ?

कंपनियां आमतौर पर मूनलाइटिंग के सख्त खिलाफ होती हैं, खासकर जब कर्मचारी फुल-टाइम एम्प्लॉई हों. कंपनियों का मानना है कि दो जगह काम करने से मुख्य नौकरी की क्वालिटी और उत्पादकता पर असर पड़ता है. इसके साथ ही सबसे बड़ा खतरा यह है कि कर्मचारी कंपनी की गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल प्रतिद्वंद्वी के लिए कर सकते हैं.

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