क्या है पैक्स सिलिका एग्रीमेंट जिस पर भारत ने किए साइन? इस क्षेत्र में खत्म होगी चीन की दादागिरी, अमेरिका भी साथ आया
तकनीकी विकास के लिए जरूरी चीजों की सप्लाई वाले समूह का हिस्सा बनने से भारत में निवेश भी आएगा और इससे देश के सेमीकंडक्टर मिशन और AI फील्ड में ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा.
अमेरिका इस बात की बहुत पहले घोषणा कर चुका है कि पैक्स सिलिका में सिर्फ वही देश शामिल हैं जो यूएस के बेहद करीबी साझीदार हैं.
Pax Silica declaration: भारत ने हाल ही में पैक्स सिलिका एग्रीमेंट पर साइन किए हैं. इस कदम से देश को टेक्नोलॉजी तक बेहतर एक्सेस मिलेगी. इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत की तरफ से आईटी मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव और भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस एग्रीमेंट पर साइन किए. पैक्स सिलिका एग्रीमेंट में पहले से ही नौ देश शामिल हैं. ये क्या है और कैसे इससे भारत को चीनी दबदबे का मुकाबला करने में मदद मिलेगी, आइये जानते हैं.
क्या है पैक्स सिलिका एग्रीमेंट?
पैक्स सिलिका अमेरिका की एक खास पहल है. इसे ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर चीन के दबदबे का मुकाबला करने के लिए बनाए गए समूह के रूप में देखा जाता है. इसका मकसद AI और सेमीकंडक्टर्स के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन को सुरक्षित करना है. किसी भी देश के तकनीकी विकास के लिए रेयर अर्थ मिनरल, सेमीकंडक्टर और सिलिकॉन की निर्बाध आपूर्ति जरूरी है जिस पर अब तक चीन का कब्जा है.
US स्टेट डिपार्टमेंट के अनुसार पैक्स सिलिका एक इंटरनेशनल ग्रुप है जो दुनिया की सबसे एडवांस्ड टेक्नोलॉजी कंपनियों वाले देशों को एकजुट करता है और एक मंच पर लाता है. पैक्स सिलिका बनाने के पीछे अमेरिका का मकसद एक ऐसा इकोसिस्टम बनाना है जिससे ग्लोबल टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन सुरक्षित रहे.
इस खास समूह में जापान, साउथ कोरिया, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया और इजराइल भी शामिल हैं. पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर सबसे पहले दिसंबर, 2025 को अमेरिका में हुए एक सम्मेलन में साइन किए गए थे. तब भारत इसका हिस्सा नहीं बना लेकिन अब इस घोषणापत्र पर भारत की तरफ से भी हस्ताक्षर कर दिए गए हैं.
पैक्स सिलिका से भारत को कैसे फायदा होगा?
अमेरिका इस बात की बहुत पहले घोषणा कर चुका है कि पैक्स सिलिका में सिर्फ वही देश शामिल हैं जो यूएस के बेहद करीबी साझीदार हैं. भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने ये भी कहा है कि अब हम भारत जैसे मित्र देशों के साथ भरोसेमंद AI टेक्नोलॉजी शेयर कर सकते हैं. पैक्स सिलिका में भारत की एंट्री को सर्जियों गोर स्ट्रेटेजिक बता चुके है.
इस समूह का हिस्सा होने से रेयर अर्थ मिनरल्स, चिप और एआई तकनीक के लिए भारत की निर्भरता चीन पर से कम होगी. चीन वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) सप्लायर है. यही कारण है कि चीन के पास अपनी मर्जी से इस सप्लाई चेन को रोकने की ताकत भी है. पैक्स सिलिका ऐसी किसी स्थिति का मुकाबला करने के लिए ही बनाया गया है.
Covid-19 के बाद से दुनिया के देशों का भरोसा भी चीन पर कम हुआ है. मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन में चीन के दबदबे का मुकाबला करने के लिए ही बड़ी टेक कंपनियों ने चीन-प्लस-वन स्ट्रैटेजी अपनाई है. तकनीकी विकास के लिए जरूरी चीजों की सप्लाई वाले समूह का हिस्सा बनने से भारत में निवेश भी आएगा और इससे देश के सेमीकंडक्टर मिशन और AI फील्ड में ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा.
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