क्या है राजनीति में गरमाया हुआ 'वंदे मातरम विवाद', बीजेपी का कांग्रेस पर आरोप.. इसी से विभाजन के 'बीज बोए गए'

Written By: Farha Fatima Updated by: Farha Fatima
Updated Date:November 7, 2025 3:16 PM IST

प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में 150वें वर्षगांठ समारोह का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि 1937 में 'वंदे मातरम' के महत्वपूर्ण छंदों को हटाने से देश के विभाजन के 'बीज बोए गए'.

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी.आर. केसवन ने शुक्रवार (7 नवंबर) को कांग्रेस पार्टी पर राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' में जानबूझकर बदलाव करने का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि 1937 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस ने गीत के उन छंदों को हटा दिया था, जो देवी दुर्गा की स्तुति करते थे. केसवन का कहना है कि यह फैसला कुछ 'सांप्रदायिक समूहों' (मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय) को खुश करने के लिए लिया गया था, जो 'वंदे मातरम' को हिंदू राष्ट्रवाद का प्रतीक मानते थे. यह बयान ऐसे समय पर आया है जब देश 'वंदे मातरम' के 150वें वर्षगांठ समारोह का आयोजन कर रहा है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्ण संस्करण के सामूहिक गायन का नेतृत्व किया.

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क्या है पूरा मामला ?

'वंदे मातरम' बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1882 में लिखा गया, यह उनके उपन्यास 'आनंदमठ' का हिस्सा है. यह गीत स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बना और 24 जनवरी 1950 को भारत का राष्ट्रीय गीत घोषित किया गया.

गीत के कुछ छंदों में मातृभूमि को देवी दुर्गा के रूप में चित्रित किया गया है, जिसे कुछ मुस्लिम समुदायों ने धार्मिक रूप से अस्वीकार्य माना. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह विवादास्पद रहा.

1937 का ऐतिहासिक संदर्भ

1937 में कांग्रेस का फैजपुर (महाराष्ट्र) अधिवेशन हुआ, जहां नेहरू कांग्रेस के अध्यक्ष थे. कांग्रेस कार्यसमिति ने फैसला लिया कि केवल गीत के पहले दो छंद ही गाए जाएंगे, बाकी छंदों को हटा दिया जाएगा. इसका कारण था मुस्लिम लीग और कुछ मुस्लिम नेताओं का विरोध, जो गीत को 'हिंदू देवी' की पूजा का प्रतीक मानते थे. सुभाष चंद्र बोस ने पूर्ण संस्करण के पक्ष में वकालत की थी, लेकिन नेहरू ने असहमति जताई.

केसवन का आरोप

केसवन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा पोस्ट साझा किया, जिसमें नेहरू के नेताजी बोस को लिखे दो पत्रों (1 सितंबर और 20 अक्टूबर 1937) का हवाला दिया. उन्होंने कहा:नेहरू ने लिखा कि 'वंदे मातरम' का पृष्ठभूमि मुस्लिमों को 'चुभ' सकती है, और इसमें 'सांप्रदायिक तत्व' हैं. नेहरू ने यह भी कहा कि गीत को किसी देवी से जोड़ना 'असभ्य' है, और यह राष्ट्रीय गीत के रूप में उपयुक्त नहीं है.

केसवन ने इसे 'ऐतिहासिक पाप' (historic sin) करार दिया और कहा कि कांग्रेस ने नेहरू के नेतृत्व में गीत के 'आध्यात्मिक सार' को कमजोर कर दिया. उन्होंने राहुल गांधी के हालिया बयानों (मार्च 2024 में 'शक्ति' पर टिप्पणी) से जोड़ते हुए कहा कि नेहरू की 'हिंदू-विरोधी मानसिकता' आज भी कांग्रेस में जारी है.

पीएम मोदी का बयान

कसवन के आरोप के ठीक बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में 150वें वर्षगांठ समारोह का उद्घाटन किया. उन्होंने कहा कि 1937 में 'वंदे मातरम' के महत्वपूर्ण छंदों को हटाने से देश के विभाजन के 'बीज बोए गए'. मोदी ने पूर्ण गीत के सामूहिक गायन का नेतृत्व किया और इसे 'राष्ट्र-निर्माण का महामंत्र' बताया. उन्होंने महिलाओं की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि मातृभूमि को पोषण देने वाली शक्ति के रूप में देखना चाहिए.

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