नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सवाल किया कि कोर्ट को उस समय क्या करना चाहिए, जब कार्यपालिका काम न कर रही हो और सरकार की निष्क्रियता की वजह से नागरिकों के अधिकारों का हनन हो रहा हो. गौरतलब है कि केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि न्यायपालिका को कार्यपालिका और नीतियों के मामले पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक कार्यक्रम में बोलते हुए बुधवार को कानून मंत्री ने कहा था कि सरकार चलाने का काम उन लोगों पर छोड़ देना चाहिए, जिन्हें लोगों ने इसके लिए चुना है और न्यायपालिका को राज्य के तीनों अंगों के बीच कानून को अलग रखने का सम्मान करना चाहिए. Also Read - पुरी के शंकराचार्य का बयान- भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा रुकवाने के लिए सुनियोजित योजना बनाई गई

सुप्रीम कोर्ट ने कुछ राज्यों द्वारा शहरी बेघरों के मुद्दों पर समिति गठित करने में विफल रहने पर अनिवार्य आदेश जारी करने की अपनी सीमा का इजहार करते हुए कहा कि उसका चाबुक टूट गया है क्योंकि ऐसे सुझाव दिये गए हैं कि न्यायपालिका को शासन के क्षेत्र में दखल से बचना चाहिए. न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा, ‘हमें बताया गया है कि शासन सरकार के लिए है और अदालतों के लिए नहीं. अगर कोई शासन नहीं है, तो हम कुछ नहीं कर सकते. Also Read - Coronavirus: जेलों में क्षमता से अधिक से कैदी, SC ने सभी राज्‍यों को जारी किए नोटिस

अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने आठ अगस्त को न्यायमूर्ति लोकुर की अध्यक्षता वाली एक पीठ को बताया था कि उसे जनहित याचिकाओं के मामले में कड़ी टिप्पणियों से बचना चाहिए क्योंकि इससे देश को परेशान करने वाले अन्य मुद्दों पर असर पड़ता है. Also Read - VIDEO: कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने पीएम नरेंद्र मोदी की तुलना नाथूराम गोडसे से की, कही ये बात

क्या कहा था रविशंकर प्रसाद ने
रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि आज वक्त बदल चुका है. आम नागरिक जानते हैं कि वो किसी भी राजनीतिक पार्टी को सत्ता से हटा सकते हैं. ये भारतीय लोकतंत्र की खूबसूरती है कि एक खालिस्तानी नेता को मैंने देश के टुकड़े करने की बात करते सुना था और बाद में उसे संविधान की शपथ लेते हुए भी सुना. आज हर व्यक्ति अपने अधिकारों को जानता है. गरिमापूर्ण जीवन को समझता है. सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा अधिकारों की रक्षा की है और ये पूरे देश के लिए गर्व की बात है. प्रसाद ने कहा, ‘यहां सुप्रीम कोर्ट की दिक्कतों की बात हुई. मैं कानून मंत्री के तौर पर हर संभव मदद करने को तैयार हूं, लेकिन आज आजादी का समारोह मनाने का दिन है न कि सुप्रीम कोर्ट में बढ़ रही भीड़ का जिक्र करने का.