नई दिल्ली। यूपीए सरकार के दौरान चलाई गई 80:20 गोल्ड स्कीम को लेकर पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम मुश्किल में घिर सकते हैं. इसे लेकर आज केंद्र सरकार ने चिदंबरम पर बड़ा हमला बोला. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि इस गोल्ड स्कीम के बहाने गीतांजलि सहित 7 कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया. रविशंकर के आरोपों के बाद 80:20 गोल्ड स्कीम फिर चर्चा में है. आइए जानते हैं क्या थी ये स्कीम और कैसे मुश्किल में पड़ सकते हैं चिदंबरम.Also Read - '100 कारणों से जाएगी एनडीए सरकार'; पूर्व वित्त मंत्री बोले- महंगाई सबसे बड़ी वजह होगी

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यूपी सरकार में लागू हुई गोल्ड स्कीम Also Read - चिदंबरम से जुड़ें INX मीडिया भ्रष्टाचार मामले की निचली अदालत में सुनवाई पर रोक

यूपीए सरकार के दौरान 13 अगस्त 2013 को सोना के आयात में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए 80:20 गोल्ड स्कीम को लागू किया गया था. इसका मकसद था कि इससे चालू खाता में हो रहे घाटे को कम किया जा सके. इस स्कीम के तहत प्रावधान ये था कि गोल्ड के आयात की इजाज़त उसी को मिलेगी जो आयात किए गए कुल गोल्ड का कम से कम 20 फीसदी आभूषणों के तौर पर निर्यात करे. नरेंद्र मोदी सरकार ने 28 नवंबर 2014 को इस स्कीम को बंद करने का फैसला लिया. यूपीए सरकार ने इस स्कीम का पहले जनवरी 2014 और फिर मई 2014 में नवीनीकरण किया.

कार्ति की गिरफ्तारी के बाद सवालों में घिरे पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम, गोल्ड स्कीम पर फंस सकते हैं

सीएजी ने अगस्त 2016 में संसद में पेश रिपोर्ट में इस स्कीम में कई खामियां गिनाईं. इसमें सबसे विवादित 21 मई 2014 का वो आदेश रहा जिसमें इस स्कीम को बढ़ाते हुए सिर्फ 7 कंपनियों को ही गोल्ड के आयात की इजाज़त दी गई. इन कंपनियों एक कंपनी मेहुल चोकसी की गीतांजली जेम्स भी थी.

16 मई 2014 को किए हस्ताक्षर

सबसे दिलचस्प बात ये है कि चिदंबरम ने इस आदेश पर 16 मई 2014 को हस्ताक्षर किए थे जिस दिन लोकसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला. यही आदेश अब चिदंबरम के लिए मुसीबत का सबब भी बन सकता है. बीजेपी और सरकार की तरफ से अब सवाल उछाला जा रहा है कि जिस दिन आम चुनाव के परिणाम आ रहे थे उसी दिन चिदंबरम को इस पर हरी झंडी देने की क्या जरूरत आ पड़ी थी.

सरकार को 1 लाख करोड़ का नुकसान

हैरत की बात ये है कि गोल्ड के आयात को रोकने के मकसद से शुरू की गई इस स्कीम के लागू होने के बाद गोल्ड के आयात में बढ़ोतरी दर्ज की गई. सीएजी ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया कि इससे सरकार को 1 लाख करोड़ का नुकसान हुआ. रविशंकर प्रसाद ने आज यही सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि 16 मई 2014 को चिदंबरम को इस आदेश पर हस्ताक्षर करने पड़े. उन्होंने पूछा कि किसके कहने पर ऐसा किया गया.