नई दिल्ली: मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान देश के सौ शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने की परियोजना सुर्खियों में रही है. लोकसभा में उठे एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने अब बताया है कि शहरों को चुने जाने की तारीख से पांच साल के भीतर उन्हें स्मार्ट सिटी बनाने की कोशिश है. सांसद दिया कुमारी ने गुरुवार को शहरी कार्य राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी से पूछा था कि स्मार्ट सिटी को कितने बजट का आवंटन है और कब तक स्मार्ट सिटी बनेंगे?

इस पर राज्य मंत्री ने बतया कि जनवरी 2016 से जून 2018 तक सौ शहरों को स्मार्ट सिटी के रूप में चयनित किया गया. स्मार्ट सिटी बनाने के लिए सौ शहरों में पांच साल के भीतर 48,000 करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है. हर शहर को पांच सौ करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव है. इतनी ही धनराशि संबंधित राज्य सरकार या स्थानीय निकाय देंगे. मंत्री ने बताया कि स्मार्ट सिटी में चयन की तारीख से अगले पांच वर्षों के बीच शहरों में इससे जुड़े विकास प्रस्तावों को धरातल पर उतारने की उम्मीद है.

ये शहर हैं स्मार्ट सिटी की लिस्ट में
लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, अलीगढ़, झांसी, बरेली, भुवनेश्वर, अमृतसर, धर्मशाला, चंडीगढ़, जयपुर, सूरत, अहमदाबाद, जबलपुर, नागपुर, नासिक, राजकोट, पटना आदि शहर स्मार्ट सिटी की लिस्ट में हैं. योजना के तहत इन शहरों की सूरत संवारे जाने की तैयारी है.