अमेरिका भारत का सबसे अच्छा दोस्त है। ओबामा के कार्यकाल में भारत के अमेरिका के साथ मधुर संबंधों के बारे में सभी जानते हैं। लेकिन अब अमेरिका की सत्ता हिलेरी क्लिंटन या डॉनल्ड ट्रंप में से किसी एक के पास आने वाली है। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव शुरु हो गए हैं और ऐसे में लोगों में ये जानने की भी उत्सुकता बढ़ गयी है कि हिलेरी और डॉनल्ड ट्रंप में से आखिर किसकी जीत पर भारत को अधिक फायदा होगा। बुधवार को आने वाले अमेरिकी चुनाव के  नतीजों का भारत पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर प्रभाव पड़ेगा। यही वजह है की दुनिया के सभी देश इस अहम चुनाव पर नजरें गड़ाए हुए हैं। आज हम अमेरिकी चुनाव में हिलेरी या ट्रंप की जीत से भारत पर क्या असर पड़ेगा इसकी विस्तार से चर्चा करेंगे।

बाजार पर असर
अपने 30 साल के राजनैतिक जीवन में हिलेरी एशिया में अमेरिका की भूमिका संबंधी कई मुद्दों पर नीतियां बनाने से जुड़ी रहीं। एक ओर जहां हिलेरी नीतियां बनाने में कुशल हैं वहीं ट्रंप अमेरिका के सबसे बड़े कारोबारियों में से एक हैं ऐसे में उनकी जीत का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा।

अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों की समझ
ओबामा प्रशासन में विदेश मंत्री की भूमिका में रहीं हिलेरी 100 से ज़्यादा देशों की यात्रा कर चुकी हैं और वे दुनिया के कई नेताओं को व्यक्तिगत तौर पर जानती हैं। सीनेटर रहते हुए हिलेरी अमरीकी कांग्रेस के इंडिया कॉकस की प्रमुख थीं। वहीं डॉनल्ड ट्रंप को अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों की कुछ भी समझ नहीं है वे एक कारोबारी हैं और राजनीति से उनका दूर दूर तक कोई वास्ता नहीं रहा।

अमेरिका में भारतीयों के लिए रोजगार
ट्रंप भारत के नागरिकों की वजह से अमेरिकी नागरिकों को रोजगार न मिल पाने का आरोप भी लगा चुके हैं। उनका कहना है कि भारतीय नागरिक अमेरिका आकर यहां की कंपनियों में कम पैसों में भी काम करने को राजी हो जाते हैं ऐसे में अमेरिकी नागरिकों को रोजगार नहीं मिल पाता। ट्रंप चाहते हैं कि H1 वीजा में बदलाव किया जाए। इससे बाहरी नागरिकों को नौकरी देना कंपनियों को मंहगा पड़ेगा। ऐसे में भारतीय नागरिकों के लिए अमेरिका में नौकरी करना मुश्किल हो जाएगा। बड़े व्यवसायी होने के कारण उनकी छवि जॉब क्रिएटर की रही है लेकिन जिस तरह से भारतीय नागरिकों पर अमेरिकी नागरिकों की नौकरी हथिया लेने का आरोप उन्होंने लगाया है उससे लगता नहीं कि उनके राष्ट्रपति बनने पर भरतीयों को इसका फायदा होगा। हालांकि हिलेरी ने H1 मुद्दे पर कुछ भी नहीं कहा।

शिक्षा
हिलेरी ने विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विदेशी छात्रों को पढ़ाई के बाद अमेरिका में रहने के लिए ग्रीन कार्ड देने की घोषणा की है। वर्ष 2014-15 में 1.33 लाख भारतीय छात्र अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे। हिलेरी क्लिंटन की इस नीति से इनमें से अधिकतर छात्र लाभान्वित हो सकते हैं। उन्होंने तकनीक के क्षेत्र में स्टार्ट अप के लिए बाहरी लोगों को छूट और सहूलियत देने का वादा भी किया है। उल्लेखनीय है कि एक बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य की 87 में से 44 अमेरिकी स्टार्ट कंपनियां विभिन्न देशों के आप्रवासियों द्वारा स्थापित की गयी हैं, जिनमें भारतीयों की अहम भूमिका रही है। डोनाल्ड ट्रंप के घोषणापत्र में इन मुद्दों पर विस्तार से कुछ नहीं कहा गया है। यह भी पढ़ें:  अमेरिका: डिक्सेविले में परंपरानुसार ‘मध्यरात्रि को मतदान’ सम्पन्न

पाकिस्तान और आतंकवाद
ट्रंप ने भारत  में पाकिस्तान द्वारा जारी आतंकवादी गतिविधियों के चलते पाकिस्तान को खतरनाक देश कहा जिससे अनुमान है कि ट्रंप सरकार में पाकिस्तान की हरकतों पर कड़ा रुख अपनाया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर हिलेरी क्लिंटन प्रशासन सामान्यतः ओबामा की नीति पर ही चलेगा, जिसमें भारत के साथ संबंध मजबूत करने के साथ दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए पाकिस्तान को साथ लेने की रणनीति शामिल है। हालांकि दोनों ही नेताओं ने वैश्विक स्तर पर आतंकवाद से निपटने के लिए भारत का समर्थन करने की बात कही है। वहीं कश्मीर मुद्दे पर दोनों ही नेता कुछ भी कहने से बचते रहे।

न्यूयॉर्क टाइम्स के सीबीएस न्यूज सर्वे के मुताबिक हिलेरी क्लिंटन को 47 फीसदी और डोनाल्ड ट्रंप को 45 फीसदी जनता की पसंद है। वहीं पाइवथट्रीएट के सर्वे के मुताबिक 67 फीसदी जनता की पसंद बन हिलेरी क्लिंटन आगे चल रही है और 32.3 फीसदी जनता की पसंद डोनाल्ड ट्रंप है। यह भी पढ़ें: अमेरिका: राष्ट्रपति चुनाव में हिलेरी क्लिंटन और डोनाल्ड ट्रंप ने मतदाताओं को रिझाने की आखिरी कोशिश की

कुछ अहम मुद्दों पर नजर डालने पर निष्कर्ष ये निकलता है कि लॉ ग्रेजुएट हिलेरी के पास अंतर्राष्ट्रीय और राजनैतिक मुद्दों की समझ है। उनके पास लंबा अनुभव है वहीं उनका प्रशासन ओबामा की नीतियों पर ही चलने के आसार हैं। ऐसे में भारत को उनके साथ निभाने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी। ट्रंप की नीतिगत अस्पष्टता जग जाहिर है और इसी को वे अपना हथियार बनाने की कोशिश में लगे हैं और व्यवस्थाओं को पूरी तरह से बदल कर रख देने का दावा कर रहे हैं। बहरहाल दोनों ही नेताओं ने भारतीयों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब चुनाव के परिणाम जो भी रहें पर भारतीयों को नजरअंदाज करना हिलेरी या ट्रंप में से किसी के लिए भी आसान नहीं होगा।