नई दिल्ली: अब तक कयास लगाए जा रहे थे कि उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) की सीएम पद की कुर्सी बचेगी या नहीं, एक दिन पहले ही जब कांग्रेस (Congress) ने एमएलसी चुनाव (MLC Election Maharashtra) के लिए अपने दूसरे उम्मीदवार का ऐलान किया तो उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ गईं क्योंकि 28 मई तक अगर वह किसी सदन सदस्य नहीं बने तो सीएम पद पर नहीं रह पाएंगे. अब उनकी मुश्किलें कम होती दिख रही हैं. कांग्रेस ने अपने दूसरे उम्मीदवार को हटाने का बड़ा फैसला लिया है. इससे उद्धव ठाकरे के एमएलसी चुने जाने का रास्ता साफ़ हो गया. उद्धव के लिए जो उम्मीदवार मैदान से हटे हैं, उनका नाम राजकिशोर इलियास पापा मोदी है. Also Read - राज्यसभा चुनाव: तीन इस्तीफों के बाद कांग्रेस ने विधायकों को रिसॉर्ट में रहने भेजा

कौन हैं पापा मोदी
राजकिशोर इलियास पापा मोदी (Rajkishore alias Papa Modi) महाराष्ट्र में कांग्रेस के अहम नेताओं में से एक हैं. वह जालना जिले में जिला परिषद के सदस्य हैं. और बीड जिले की इकाई के प्रमुख हैं. एमएलसी चुनाव के लिए दूसरे उम्मीदवार के रूप में उनके नाम पर मुहर भी महाराष्ट्र कांग्रेस द्वारा नहीं बल्कि दिल्ली ने लगाई थी. एक दिन पहले ही महाराष्ट्र कांग्रेस ने इसकी जानकारी भी दी थी. कांग्रेस ने कहा कि हमारे दोनों कैंडिडेट हर हाल में जीतेंगे. Also Read - Cyclone Nirsaga: रायगढ़ जिले का जायजा लेने पहुंचे उद्धव ठाकरे, 100 करोड़ रुपये के आपातकालीन राहत पैकेज की घोषणा

उद्धव की बढ़ी थीं मुश्किलें, लेकिन अब…
ऐसा होते ही उद्धव ठाकरे और शिवसेना में खलबली थी, लेकिन ये मुश्किल 24 घंटे में ही हल हो गई. कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार राजकिशोर उर्फ़ पापा मोदी को हटाने का ऐलान कर दिया. महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे की कुर्सी बची रहे, इसके लिए कांग्रेस (Congress) ने बड़ी रणनीति बनाई. अब उद्धव ठाकरे को निर्विरोध एमएलसी चुना जाना लगभग तय है. एमएलसी बनने पर उद्धव की मुख्यमंत्री की कुर्सी को कोई खतरा नहीं होगा. महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रमुख बालासाहेब थोराट ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे निर्विरोध विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) बनने वाले हैं क्योंकि कांग्रेस अपना एक उम्मीदवार हटाएगी. कांग्रेस पार्टी ने तय किया है कि वह अपने दूसरे उम्मीदवार को चुनाव से हटा रही है. Also Read - गुजरात में कांग्रेस के एक और विधायक ने दिया इस्‍तीफा, राज्‍यसभा चुनाव से पहले 8 MLA ने छोड़ा साथ

ये हैं संवैधानिक नियम
बता दें कि उद्धव ठाकरे अब तक विधायक या एमएलसी नहीं हैं. इसलिए उनकी कुर्सी खतरे में थी. संविधान के मुताबिक किसी मुख्यमंत्री या मंत्री को शपथ लेने के छह महीने के अंदर विधानसभा या विधानपरिषद में से किसी की सदस्यता ग्रहण करनी होती है, ऐसा नहीं होने पर उसे इस्तीफा देना पड़ता है. उद्धव ठाकरे ने 28 नवंबर 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और उनके छह महीने 28 मई 2020 को पूरे हो रहे हैं. महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार ने हाल ही में कैबिनेट की एक बैठक में ठाकरे का नाम राज्यपाल द्वारा विधान परिषद के लिये नामित किए जाने वाले सदस्य के तौर पर सुझाया था.

कुछ दिन पहले शिवसेना ने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी पर निशाना साधा था कि वह एमएलसी पद के लिए उद्धव ठाकरे को नामित नहीं कर रहे हैं. जबकि वह अपने कोटे से ऐसा कर सकते हैं. मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav thackarey) को विधान परिषद (MLC) का सदस्य निर्वाचित करने में राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की तरफ से मंजूरी न मिलने पर शिवसेना का गुस्सा फूट पड़ा था. वहीं, अब कांग्रेस ने नई रणनीति बनाते हुए इसकी ज़रूरत ही ख़त्म कर दी है.