नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार 4 जजों की प्रेस कॉनफ्रेंस ने देश में हलचल मचा दी है. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोर्चा संभालने वाले जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर की कहानी बेहद दिलचस्प है. जस्टिस चेलमेश्वर का जन्म 23 जून 1953 को हुआ था. वह सुप्रीम कोर्ट में जज हैं. इससे पहले वह केरल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं. Also Read - Employee Pension Scheme: सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से पेंशन में 300% से अधिक की हो सकती है बढ़ोतरी, जानें- कैसे होगी गणना?

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चेलमेश्वर का जन्म आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में जस्ती अन्नापूर्णा और लक्ष्मीनारायण के घर हुआ था. उनके पिता कृष्णा जिले में मछलीपटनम में वकील थे. चेलमेश्वर ने मद्राल लोयोला कॉलेज से विज्ञान (फिजिक्स) में ग्रेजुएशन किया और 1976 में विशाखापटनम में आंध्र यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई पूरी की. Also Read - इतालवी नौसैनिक मामला में SC ने केंद्र को दिया आदेश, कहा-मारे गए मछुआरों के लिए मुआवजा राशि जमा कराए

चेलमेश्वर ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में अडिश्नल जज के रूप में सेवाएं दी. इसके बाद, 2007 में वह गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने. इसके बाद उन्हें केरल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में ट्रांसफर दिया गया और अक्टूबर 2011 में वह सुप्रीम कोर्ट में जज की भूमिका में आए.

अस्पष्ट देरी की वजह की वजह से वह 2011 में सुप्रीम कोर्ट में आए थे और इसी वजह से उनके सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बनने का अवसर चला गया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का जज रहते कई ऐतिहासिक फैसले दिए हैं.

आधार

जस्टिस चेलमेश्वर, शरद अरविंद बोबडे, सी नगप्पन की बेंच ने आधार पर अहम फैसला देते हुए कहा था कि किसी भी भारतीय नागरिक को आधार कार्ड के बिना बुनियादी सुविधाओं और सरकारी सब्सिडी को देने से इनकार नहीं किया जा सकता है.

नेशनल जुडिशल अपॉइंटमेंट कमिशन

नेशनल जुडिशल अपॉइंटमेंट कमिशन (NJAC) पर फैसले (2015) में चेलमेश्वर ने असहमति वाली राय प्रकट की. चेलमेश्वर ने जज की नियुक्ति के लिए बनाए गए कॉलेजियम सिस्टम को क्रिटिसाइज किया था.