नई दिल्ली. पुणे पुलिस ने देश के अलग-अलग राज्यों में छापेमारी करके पांच सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है. इनमें सुधा भारद्वाज भी हैं. उन्हें महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया है. वह एक वकील और एक्टिविस्ट हैं. इसके साथ ही वह दिल्ली के लॉ यूनिवर्सिटी में गेस्ट फैकल्टी के तौर पर पढ़ाती भी हैं. Also Read - भीमा-कोरेगांव हिंसा 'गहरी' साजिश, इसके प्रभाव काफी गंभीर: बॉम्बे हाईकोर्ट

बता दें कि सुधा के पिता रंगनाथ भारद्वाज देश-विदेश के जाने-माने अर्थशास्त्री थे. वहीं उनकी मां कृष्णा भारद्वाज दिल्ली के जवाहर लाल यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में इकॉनमिक्स डिपार्टमेंट की डीन हुआ करती थीं. वह अमर्त्य सेन की समकालीन थीं. सुधा का जन्म अमेरिका में साल 1961 में हुआ था और वहीं उनकी प्राइमरी शिक्षा हुई. लेकिन साल 1971 में वह अपनी मां के साथ भारत लौट आईं.
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अमेरिका की नागरिकता छोड़ने वाली आईआईटी टॉपर
सुधा साल 1978 की कानपुर आईआईटी टॉपर हैं. बाद के दिनों में उन्होंने अमेरिका की अपनी नागरिकता छोड़ दी और दिल्ली में झुग्गी-मजदूर बस्तियों के बच्चों के लिए काम करना शुरू कर दीं. इतना ही नहीं वह बच्चों को पढ़ाती थीं और मजदूरों को जागरुक करने के साथ-साथ उनके अधिकारों के लिए काम करती थीं. Also Read - नक्‍सल लिंक: घर में नजरबंद किए गए गिरफ्तार कार्यकर्ता, कहा हमें फंसाया गया है

1984 से कर रही हैं काम
साल 1984-85 में मध्यप्रदेश के इलाके (अब छत्तीसगढ़) में शंकर गुहा नियोगी मजदूर आंदोलन चला रहे थे. सुधा इस आंदोलन से प्रभावित हुईं और उनके साथ जुड़ गईं. इसी दौरान उन्हें वकीलों की जरूरत होती थी, जिसके लिए बाद में 40 की उम्र में उन्होंने वकालत की डिग्री ली. इससे वह मजदूरों और आदिवासियों के न्याय के लिए उठ खड़ी हुई.

ट्रेड यूनियन में भी रही हैं शामिल
सुधा तकरीबन 35 साल से छत्तीसगढ़ में मजदूर, किसान और गरीबों की लड़ाई लड़ रही हैं. बताया जाता है कि वह बिना फीस लिए गरीबों का केस लड़ती हैं. वह ट्रेड यूनियन में भी शामिल हैं. साथ ही वह दिल्ली न्यायिक अकादमी का भी एक हिस्सा हैं. वह श्रीलंका में लेबर कोर्ट के अधिकारियों को भी संबोधित कर चुकी हैं. बता दें कि साल 2007 स् सुधा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर में बतौर वकील कार्यरत हैं. हाईकोर्ट ने उन्हें राज्य स्तरीय सेवा प्राधिकरण का सदस्य भी नियुक्त किया है.