नई दिल्ली: देश के 47वें प्रधान न्यायाधीश शरद अरविन्द बोबडे ने आधार प्रकरण सहित अनेक महत्वपूर्ण मामलों की उच्चतम न्यायालय में सुनवाई की है. वह राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद की सुनवाई करने वाली संविधान पीठ के भी सदस्य हैं जिसका फैसला 15 नवबर तक आने की उम्मीद है. महाराष्ट्र के वकीलों के परिवार के सदस्य न्यायमूर्ति बोबडे अगस्त 2017 में निजता को मौलिक अधिकार घोषित करने वाली संविधान पीठ के भी सदस्य थे. निजता का सवाल आधार योजना की सुनवाई के दौरान उठा था और फिर इसे नौ सदस्यीय संविधान पीठ को सौंप दिया गया था. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद की 16 अक्टूबर को सुनवाई पूरी की थी. न्यायमूर्ति बोबडे भी इस संविधान पीठ के सदस्य हैं.

शीर्ष अदालत के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश 63 वर्षीय न्यायमूर्ति बोबडे वर्तमान प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई का स्थान लेंगे जो 17 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं. न्यायमूर्ति बोबडे 23 अप्रैल, 2021 तक देश के प्रधान न्यायाधीश रहेंगे. कानून मंत्रालय ने मंगलवार को न्यायमूर्ति बोबडे की देश के नये प्रधान न्यायाधीश पद पर नियुक्ति संबंधी अधिसूचना जारी की. न्यायमूर्ति बोबडे करीब 17 महीने इस पद पर रहेंगे. इससे पहले, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश के नये प्रधान न्यायाधीश पद पर न्यायमूर्ति बोबडे की नियुक्ति के वारंट पर हस्ताक्षर किये. प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने स्थापित परपंरा के अनुरूप पिछले सप्ताह ही अपने उत्तराधिकारी के रूप में शीर्ष अदालत के वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति बोबडे की नियुक्ति की सिफारिश केन्द्र से की थी.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच करने वाली तीन सदस्यीय आंतरिक समिति की अध्यक्षता भी न्यायमूर्ति बोबडे ने ही की थी. इस समिति में दो महिला न्यायाधीश भी थीं. शीर्ष अदालत की एक पूर्व कर्मचारी ने यह आरोप लगाया था. न्यायमूर्ति बोबडे उस तीन सदस्यीय पीठ के भी सदस्य थे जिसने 2015 में स्पष्ट किया था कि आधार कार्ड नहीं रखने वाले किसी भी भारतीय नागरिक को बुनियादी सेवाओं और सरकारी सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता . न्यायमूर्ति बोबडे की अध्यक्षता वाली दो सस्यीय पीठ ने हाल ही में क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड के कामकाज का संचालन करने वाली प्रशासकों की समिति को अपना काम खत्म करने का निर्देश दिया ताकि बीसीसीआई के संचालन के लिये नये सदस्यों का निर्वाचन हो सके. शीर्ष अदालत ने ही प्रशासकों की इस समिति की नियुक्ति की थी.

नागपुर में 24 अप्रैल, 1956 को जन्मे न्यायमूर्ति बोबडे ने नागपुर विश्वविद्यालय से अपनी स्नातक और फिर कानून की शिक्षा पूरी की. न्यायमूर्ति बोबडे ने 1978 में महाराष्ट्र बार काउन्सिल में पंजीकरण कराने के बाद बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ में वकालत शुरू की. वह 1998 में वरिष्ठ अधिवक्ता बनाये गये थे. न्यायमूर्ति बोबडे की 29 मार्च 2000 को बंबई उच्च न्यायालय में अतिरिक्त न्यायाधीश पद पर नियुक्ति हुयी. वह 16 अक्टूबर , 2012 को मप्र उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने और 12 अप्रैल 2013 को पदोन्नति देकर उन्हें उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश बनाया गया.

(इनपुट भाषा)