
Akarsh Shukla
मैं, आकर्ष शुक्ला, पिछले 8 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय हूं और वर्तमान में India.com Hindi (ZEE Media) में शिफ्ट इंचार्ज की जिम्मेदारी निभाते हुए नेशनल टीम का नेतृत्व ... और पढ़ें
हरियाणा पुलिस महकमे से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. हरियाणा कैडर के 2001 बैच के आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर 2025 की सुबह चंडीगढ़ में अपने सरकारी आवास पर खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. उनके इस कदम से पूरा प्रशासनिक ढांचा हिल गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वाई पूरन कुमार अपने सख्त, ईमानदार और निडर स्वभाव के लिए जाने जाते थे. वे ऐसे अफसर थे जिन्होंने कभी सत्ता के सामने झुकना नहीं सीखा और हर बार सिस्टम में चल रही गड़बड़ियों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई. उनकी पत्नी अमनीत कौर भी हरियाणा कैडर की आईएएस अधिकारी हैं.
घटना चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित उनके सरकारी आवास की है. सुबह लगभग 9 बजे गोली चलने की आवाज सुनकर प्रशासनिक हलकों में तुरंत हलचल मच गई. जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो पाया कि आईपीएस वाई पूरन कुमार ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मारी थी. मौके पर ही उनकी मौत हो गई. फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से सबूत जुटाए और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया. चंडीगढ़ पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और उनकी पत्नी के लौटने के बाद बयान दर्ज करने की तैयारी की जा रही है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वाई पूरन कुमार हरियाणा पुलिस के उन अफसरों में से एक थे जो निडर होकर भ्रष्टाचार, जातीय भेदभाव और राजनीतिक हस्तक्षेप के खिलाफ बोलने से कभी पीछे नहीं हटे. अपने करियर में उन्होंने आईजीपी (रोहतक रेंज), आईजीपी (कानून-व्यवस्था), आईजी (दूरसंचार) और हाल में आईजी, पुलिस ट्रेनिंग सेंटर (PTC) सुनारिया, रोहतक जैसी अहम जिम्मेदारियां संभालीं. उन्हें 2025 के मध्य में रोहतक से सुनारिया ट्रांसफर किया गया था, जिसे उन्होंने अन्यायपूर्ण और प्रशासनिक दबाव बताया था.
वाई पूरन कुमार का नाम कई बार सरकारी विवादों और कोर्ट मामलों में सामने आया.
वाई पूरन कुमार ने कई बार यह दावा किया था कि वरिष्ठ अधिकारी उन्हें परेशान कर रहे हैं और उनके कैरियर को नुकसान पहुंचाने के लिए साजिश रच रहे हैं. उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर अपनी सुरक्षा के लिए आवेदन भी दिया था. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने यह भी कहा था कि उन पर मानसिक और संस्थागत दबाव लगातार बढ़ रहा है. आईपीएस वाई पूरन कुमार उन गिने-चुने अधिकारियों में से थे जो न्याय, पारदर्शिता और ईमानदारी के प्रतीक माने जाते थे. लेकिन उसी सिस्टम के भीतर रहते-रहते वे इतने अकेले पड़ गए कि आखिरकार खुद पर गोली चलाने जैसा कठोर निर्णय ले लिया.
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