नई दिल्ली/श्रीहरिकोटा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) शुक्रवार को अंतरिक्ष में शतक लगाया. सुबह 9.28 पर श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र से इसरो ने अपने 100वें उपग्रह को लॉन्च किया. कार्टोसैट 2 सैटेलाइट 710 किलो वजनी है. यह निगरानी उपग्रह है और इससे तटीय क्षेत्रों और शहरों की निगरानी के लिए इस्‍तेमाल किया जाएगा. इसमें हाईरेजुलेशन कैमरा लगा है जिससे खींची फोटो का इस्‍तेमाल किया जाएगा. इसे चार स्‍तर पर लॉन्‍च किया जाएगा. 

इसरो की बड़ी छलांग, काटरेसैट-2 सहित 31 सैटेलाइट किए लॉन्च 

इसरो की बड़ी छलांग, काटरेसैट-2 सहित 31 सैटेलाइट किए लॉन्च 

लॉन्चिंग की पूरी प्रक्रिया ढाई घंटे की है. पीएसएलवी-सी40 वर्ष 2018 की पहली अंतरिक्ष परियोजना है. सह-यात्री उपग्रहों में भारत का एक माइक्रो और एक नैनो उपग्रह शामिल है जबकि 6 अन्य देशों- कनाडा, फिनलैंड, फ्रांस, कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका के तीन माइक्रो और 25 नैनो उपग्रह शामिल किए जा रहे हैं. 6 देशों के 25 उपग्रह इसरो द्वारा लॉन्च किए जाने की बात नई नहीं है, आपने पूर्व में भी इसरो द्वारा विदेशी सैटेलाइट की लॉन्चिंग की खबर सुनी होगी. आखिर क्या वजह है कि फ्रांस, कोरिया, ब्रिटेन और अमेरिका की भी सैटेलाइट कंपनियां लॉन्चिंग को लेकर इसरो पर भरोसा करने लगी हैं.

इसमें सबसे अहम है लागत का कम होना. इसरो के पास सैटेलाइट लॉन्च करने की सस्ती तकनीक है. इसकी लागत नासा या किसी अन्य स्पेस एजेंसी की अपेक्षा बेहद कम होती है. एक सैटेलाइट लॉन्चिंग के लिए इसरो बेहद कम कीमत लेता है. एक अनुमान के मुताबिक ये 700 करोड़ रुपये के लगभग है. जबकि नासा सहित दुनिया की बाकी स्पेस एजेंसियां इसके लिए भारी भरकम राशि लेती हैं.

इसरो ने हाल के वर्षों में नई कामयाबी हासिल की है. एक के बाद एक उसने कई सैटेलाइट की लॉन्चिंग कामयाबी पूर्वक की है. कामयाबी का यही ट्रैक रिकॉर्ड दुनिया को इसरो के पास आने के लिए मजबूर कर देता है. इसके अतिरिक्त जो पक्ष मजबूत है वो ये कि किसी भी तरह के गड़बड़ की आशंका या गैरकानूनी ढंग से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की संभावना नहीं रहती है. आखिर भारत अपने ट्रैक रिकॉर्ड के साथ एक एक देश के रूप में जाना जाता है जिसपर दुनिया भरोसा करती है.

‘अर्थ2 ऑर्बिट’ एक ऐसी कंपनी है जो इसरो और निजी कंपनियों के बीच लॉन्च डील कराने में मदद करती है. कंपनी की सीईओ सुष्मिता मोहंती ने एक वेबसाइट से बातचीत में कहा था कि इस तरह के सैटेलाइट लॉन्च की जरूरत बढ़ती जा रही है. नई कंपनियां व्यावसायिक तौर पर तैयार कई सैटेलाइट को एक साथ छोड़ने की योजना बना रही हैं. भारत को इस व्यवसाय में, समय सीमा के भीतर कई कामयाब लॉन्चिंग से फायदा मिल सकता है.

मोहंती ने बताया कि विदेशों से सैटेलाइट लॉन्च कर पाना अब भी बहुत आसान नहीं है. सरकारी उपग्रह एजेंसी के रॉकेट से विदेशी व्यवसायिक उपग्रह को भेजने की प्रक्रिया काफ़ी जटिल है. इसमें नियम, समझौते और कानून जैसी कई अड़चनें हैं. इसके अलावा वैज्ञानिकों को अब दूसरे देश की स्पेस एजेंसियों से ही नहीं, बल्कि स्पेस एक्स जैसी निजी कंपनियों से भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है.

दुनिया में 12 ही देश हैं जो ऑर्बिट में सैटेलाइट लॉन्च करने की क्षमता रखते हैं. रूस, अमेरिका, फ्रांस, जापान, चीन, यूके, भारत, यूक्रेन, इजरायल, इरान और नॉर्थ कोरिया इसमें प्रमुख हैं. यूरोपीय स्पेस एजेंसी भी ये काम करती है.