छत्तीसगढ़ में वोटर्स को क्यों नहीं लुभा पाई कांग्रेस, कैसे पहली बार BJP ने पार किया 50 का आंकड़ा?

Chhattisgarh Chunav Results 2023: छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की हार की कई वजहें रही हैं, जिसमें आदिवासी वोटर्स को नहीं लुभा पाना सबसे बड़ा कारण है. साथ ही पीएम मोदी का जादू और हिंदुत्व भी कारण रहे हैं.

Updated: December 4, 2023, 1:05 PM IST

Chhattisgarh Vidhan Sabha Election Results 2023: वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद पहली बार BJP ने 50 सीटों का आंकड़ा पार किया है. वहीं, कांग्रेस (Congress) इस बार के चुनाव में अपने 2018 के प्रदर्शन को दोहराने में विफल रही. पिछले चुनाव में पार्टी ने 90 में से 68 सीटों पर जीत हासिल की थी. इस बार कांग्रेस (Congress) को केवल 35 सीटें ही मिली हैं.

3 दिसंबर को नतीजे घोषित होने के बाद BJP ने 90 सीटों वाली विधानसभा में अपनी सीटों की संख्या 15 से बढ़ाकर 54 कर कांग्रेस (Congress) को बढ़त देने वाले एग्जिट पोल को झूठा साबित कर दिया.

भूपेश बघेल की कैबिनेट के 13 में से 9 मंत्री हारे (Bhupesh Baghel Seat Reasult)

कांग्रेस (Congress) के प्रति जनता की नाराजगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भूपेश बघेल कैबिनेट के 13 में से नौ मंत्री अपनी सीट नहीं बचा सके. बघेल (पाटन निर्वाचन क्षेत्र) तथा उनके मंत्री कवासी लखमा (कोंटा), उमेश पटेल (खरसिया) और अनिला भेड़िया (डौंडीलोहारा) ही BJP की लहर का सामना करने में कामयाब रहे.

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष चरण दास महंत ने अपनी सक्ती सीट जीत ली है, लेकिन प्रदेश कांग्रेस (Congress) अध्यक्ष दीपक बैज चित्रकोट से हार गए.

BJP के ज्यादातर बड़े चेहरे जीते चुनाव (Chattisgarh Chunav 2023 BJP Winning Candidates)

BJP की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह राजनांदगांव से चुनाव जीत गए हैं. BJP प्रदेश अध्यक्ष और सांसद अरुण साव ने लोरमी सीट जीत ली है तथा पत्थलगांव सीट पर एक अन्य सांसद गोमती साय भी विजयी हुईं. केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह ने भरतपुर-सोनहत से तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णु देव साय ने कुनकुरी सीट जीत ली है.

BJP के पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल (रायपुर शहर दक्षिण), अजय चंद्राकर (कुरुद), पुन्नूलाल मोहिले (मुंगेली), अमर अग्रवाल (बिलासपुर), दयालदास बघेल (नवागढ़) और राजेश मूणत (रायपुर शहर पश्चिम) ने भी जीत हासिल की है. पूर्व आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी और नीलकंठ टेकाम भी अपनी अपनी सीट जीतने में सफल हुए हैं.

कांग्रेस (Congress) ने चुनाव प्रचार में बघेल सरकार की कल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करते हुए दावा किया था कि सरकार ने इस योजनाओं पर 1.75 लाख करोड़ रुपये खर्च किये हैं. पार्टी ने छत्तीसगढ़ी अस्मिता के मुद्दे पर भी जोर दिया और भूपेश बघेल को माटी पुत्र के रूप में पेश किया.

BJP के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही चुनाव का प्रमुख चेहरा थे. उन्होंने जुलाई माह से ही राज्य का दौरा शुरू कर दिया और उनकी सभाओं में भारी भीड़ उमड़ी.

BJP और कांग्रेस (Congress) ने इस चुनाव में लगभग समान रियायतें और कल्याणकारी योजनाओं का वादा करके एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश की.

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित BJP नेताओं ने महादेव सट्टेबाजी ऐप और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कथित कोयला और शराब घोटालों की जांच को लेकर बघेल सरकार पर निशाना साधा.

पार्टी ने बेमेतरा और कवर्धा जिलों में सांप्रदायिक हिंसा तथा राज्य के बस्तर क्षेत्र में कथित धर्म परिवर्तन को लेकर भी कांग्रेस (Congress) को घेरने का प्रयास किया.

BJP ने साजा सीट से ईश्वर साहू को मैदान में उतारा, जिनके बेटे की बिरनपुर में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान हत्या कर दी गई थी. साहू ने प्रभावशाली कांग्रेस (Congress) नेता और मंत्री रवींद्र चौबे को 5,196 वोटों के अंतर से हराया.

कवर्धा सीट पर BJP के विजय शर्मा ने कांग्रेस (Congress) के मंत्री मोहम्मद अकबर को 39,592 वोटों से हराया. अकबर ने 2018 विधानसभा चुनाव में कवर्धा सीट 59,284 वोटों से जीती थी.

साजा में प्रचार के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि ईश्वर साहू सिर्फ उम्मीदवार ही नहीं हैं, बल्कि न्याय की लड़ाई के प्रतीक हैं और अगर BJP सत्ता में वापस आई तो उनके बेटे भुनेश्वर साहू के हर हत्यारे को जेल भेजा जाएगा.

भ्रष्टाचार के अलावा, BJP ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लागू न करने और शराबबंदी तथा संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण सहित कांग्रेस (Congress) के 2018 के वादों को पूरा करने में विफलता को लेकर भी पार्टी पर निशाना साधा.

राज्य में हुए मतदान से यह साफ हो गया है कि BJP पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में वोट प्रतिशत में 10.1 प्रतिशत के बड़े अंतर को पाटने में कामयाब रही. BJP का वोट प्रतिशत 2018 में 32.97 प्रतिशत था जो बढ़कर 2023 में 46.27 प्रतिशत हो गया. दूसरी ओर, कांग्रेस (Congress) का वोट प्रतिशत 43.04 से घटकर 42.23 प्रतिशत हो गया.

राजनीति के जानकारों के अनुसार, BJP के पारंपरिक वोट जो 2018 में 15 साल की सत्ता विरोधी लहर के कारण कांग्रेस (Congress) की तरफ चले गए थे, इस चुनाव में भगवा पार्टी में लौट आए.

सरगुजा क्षेत्र की सभी सीटों पर हारी कांग्रेस (Surguja Election Results 2023)

जनजातीय बहुल सरगुजा क्षेत्र में कांग्रेस (Congress) सभी 14 सीटें हार गईं, जिन पर पार्टी 2018 के चुनावों में जीती थी. इन सीटों में अंबिकापुर भी शामिल है जहां से उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव 94 वोटों के मामूली अंतर से चुनाव हार गए हैं. BJP द्वारा मैदान में उतारे गए 47 नए चेहरों में से 29 विजयी हुए.

BSP का नहीं खुला खाता

गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (GGP) के साथ गठबंधन में यह विधानसभा चुनाव लड़ने वाली बहुजन समाज पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली, जबकि GGP ने राज्य के गठन के बाद पहली बार पाली तानाखार सीट जीत कर अपना खाता खोला है. 2018 में, बसपा ने दो सीटें जीती थीं.

2018 में पांच सीटें हासिल करने वाली जनता कांग्रेस (Congress) छत्तीसगढ़ (जे) इस बार अपना खाता खोलने में विफल रही.

AAP का भी नहीं खुला खाता

अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी ने छत्तीसगढ़ में दूसरी बार अपनी किस्मत आजमाई और 53 सीटों पर चुनाव लड़ा, उसे भी कोई सीट नहीं मिली और उसे 0.93 प्रतिशत वोट हासिल हुए.

(With agency inputs)

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