नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस हर तरह के प्रयास कर रही है. गुजरात के सबसे बड़े ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर को कांग्रेस ने अपनी पार्टी में शामिल किया. फिर पाटीदार नेता हार्दिक पटेल पर नजरें टिकाईं. हार्दिक ने भी कांग्रेस के प्रति नरमी दिखाई है. हार्दिक के बाद कांग्रेस की निगाहें दलित नेता जिग्नेश मेवानी पर हैं. पहले खबर आई कि जिग्नेश मंगलवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करेंगे. इस दौरान गुजरात कांग्रेस के इन्चार्ज अशोक गहलोत भी रहेंगे. हालांकि बाद में जिग्नेश ने इस खबर का खंडन किया.Also Read - सुरजेवाला का आरोप, 'दिल्ली पुलिस ने सात घंटे से अधिक की हिरासत के बाद कांग्रेस नेताओं को रिहा किया'

जिग्नेश ने फेसबुक पेज पर लिखा कि मेरा मीडिया के साथियों से सादर अनुरोध है कि कृपया यह गलत खबर दोबारा मत चलाइए कि हम आज राहुल गांधी से मिलने वाले हैं. हम राहुल गांधी को या किसी भी नेता को मिलेंगे तो हमारे व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं मिलेंगे, मिलेंगे तो दलित समाज के जिन सवालों को लेकर गुजरात की बीजेपी सरकार बात करने को तैयार नही उस सवालों पर कांग्रेस पार्टी का पक्ष क्या है उस की स्पष्टता के लिए ही मिलेंगे. हम चोरी-छिपे किसी को क्यों मिले? रही बात मिलने-जुलने की तो खबर यह बनना चाहिए कि 22 साल में गुजरात की जनता को क्या मिला? Also Read - पंजाब में अब मंत्रिमंडल में बदलाव की संभावना, क्या सिद्धू भी सरकार में बनाए जाएंगे मंत्री?

इससे पहले मंगलवार को अशोक गहलोत ने कहा कि जिग्नेश दिल्ली में है. राहुल गांधी से उनकी मुलाकात नहीं हुई है. मेरी दो बार जिग्नेश से मुलाकात हुई है. दलित अत्याचार पर जिग्नेश के दिल में बहुत दर्द है. Also Read - Rajasthan Cabinet Expansion News: गहलोत कैबिनेट का विस्तार जल्द! कई मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी, डोटासरा के वीडियो से...

8 फीसदी दलित वोटों पर कांग्रेस की नजर-
जिग्नेश का जन्म वर्ष 1980 में गुजरात के मेहसाना में हुआ था. जिग्नेश के पिता नगर निगम के कर्मचारी थे और अब रिटायर हो चुके हैं. जिग्नेश अहमदाबाद के दलित बहुल क्षेत्र मेघानी नगर में रहते हैं. जिग्नेश धारा प्रवाह अंग्रेजी, हिंदी और गुजराती बोलते हैं. उन्होंने दिल्ली में जेएनयू के छात्रों के संघर्ष में भी शिरकत की है.

गुजरात में दलितों की आबादी 8 फीसदी है. जिग्नेश दलित नेता हैं. गुजरात में बीते 2-3 सालों में कथित दलित उत्पीड़न की खबर ने कांग्रेस को उम्मीदें दे दी हैं. कांग्रेस किसी भी कीमत पर इस 8 फीसदी वोट बैंक को अपने पाले में लाना चाहती है और इसी कोशिश में जिग्नेश मेवानी उसके लिए तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं.

36 वर्षीय जिग्नेश ने गुजरात में युवा दलित नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई है. चार साल तक पत्रकारिता कर चुके जिग्नेश पेशे से वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. जिग्नेश ने ऊना में गोरक्षा के नाम पर दलितों की पिटाई के खिलाफ हुए आंदोलन का नेतृत्व किया. महात्मा गांधी की ‘दांडी यात्रा’ से प्रेरणा लेते हुए जिग्नेश ने दलितों की यात्रा का आयोजन किया और उसे “दलित अस्मिता यात्रा” नाम दिया.

मेवानी तब अचानक खबरों में आए जब उन्होंने वेरावल में उना वाली घटना के बाद उन्होंने घोषणा की कि ‘अब दलित लोग समाज के लिए मरे हुए पशुओं का चमड़ा निकालना, मैला ढोने, आदि काम नहीं करेंगे. मेवानी ने बताया कि बापू ने अपनी यात्रा के लिए लोगों का चयन किया था, मैंने भी ठीक वैसा ही किया. हम जिस गांव से गुजरे, हजारों लोग हमारे स्वागत के लिए आगे आए. मैंने उन हजारों लोगों को शपथ दिलाई कि अब वे मरे हुए जानवरों को नहीं उठाएंगे और सरकार से अपने लिए दूसरे काम की बात करेंगे.’

हजारों दलित और मुस्लिम कार्यकर्ताओं के साथ मेवानी उना पहुंचे. 70वें स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने ऊना के दलित पीड़ितों के साथ तिरंगा झंडा फहराया. पिछले दो दशकों से गुजरात में नेताओं की कुछ कमी दिखती रही है. कांग्रेस का तो राज्य में जैसे कोई चेहरा ही नहीं है और गुजरात और गुजराती सिर्फ एक नेता को जानते हैं- नरेंद्र मोदी. 2015 में हार्दिक पटेल के सामने आने और नेता बनने की बात एक जगह है लेकिन जानकार जिग्नेश को एक अलग नजर से देखते हैं.

कुछ जानकारों का मानना है कि 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव में मेवाणी आम आदमी पार्टी का भी नेतृत्व कर सकते हैं.