Debt On India: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पिछले हफ्ते देश पर लदे कर्ज को लेकर कुछ नए आंकड़े जारी किए, जो कई लोगों को डरावने लगे. इन आंकड़ों के मुताबिक भारत का विदेशी कर्ज जून 2025 के अंत में 747.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया. यह मार्च 2025 के अंत के मुकाबले 11.2 अरब डॉलर ज्यादा है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा कि भारत पर कर्ज क्यों बढ़ रहा है? क्या यह चिंता का विषय है? या दुनिया के बाकी देशों की भी कुछ ऐसा ही हाल है.
पहले अमेरिका की बात
अमेरिका पर जीडीपी का 121 फीसदी कर्ज हो जो करीब 52262 लाख करोड़ रुपये बैठता है. ट्रंप कर्ज करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन फिर भी अमेरिका को रोज अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है.
ब्रिटेन और फ्रांस का हाल भी जान लीजिए
फ्रांस पर 5,771 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है, जो फ्रांस की जीडीपी का 113 फीसदी है. वहीं ब्रिटेन 5592 करोड़ रुपये (जीडीपी का 96.4 प्रतिशत) का कर्ज है.
दूसरे विकसित देशों का भी हाल जान लीजिए
जापान पर कर्ज लगभग 9863 लाख करोड़ रुपये है, जो GDP का 250 फीसदी है. जर्मनी की हालत भी खस्ता है.
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क्यों बढ़ रहा कर्ज
विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना में दुनिया के कई देशों ने भारी-भरकम कर्ज लिया. वहीं कई देशों में इकोनॉमी का सिकुड़ना भी कारण है. वहीं भारत जैसे देश तरक्की के लिए कर्ज ले रहे हैं. भारत के संदर्भ में एक और अच्छी बात यह है कि भारत पर इतना कर्ज नहीं है कि संभाला नहीं जा सके. फिर कर्ज बढ़ रहा और भारत के हर व्यक्ति पर औसतन 4.8 लाख रुपये का कर्ज है.
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