कर्ज, EMI, कैंसर... AI ने एक झटके में भारत के हजारों लोगों को बना दिया लाचार, Oracle में छंटनी की असल वजह

Oracle ने AI और डेटा सेंटर पर भारी निवेश के चलते बड़े पैमाने पर छंटनी की है. इससे भारत सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां एक रात में ही हजारों नौकरियां गईं. कंपनी लागत घटाकर भविष्य की टेक्नोलॉजी पर फोकस कर रही है.

Updated Date:April 1, 2026 8:24 PM IST

By Tanuja Joshi Edited By Tanuja Joshi

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Oracle Layoff: दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी Oracle ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने IT इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है. कंपनी ने हजारों कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है और रिपोर्ट्स के मुताबिक ये संख्या 30,000 तक हो सकती है. इनमें से करीब 12,000 कर्मचारी भारत से बताए जा रहे हैं, जिससे देश का IT सेक्टर भी चिंता में है.

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सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि ये छंटनी उस समय हुई है जब Oracle ने हाल ही में शानदार रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर मुनाफा कमाने वाली कंपनी को इतनी बड़ी छंटनी की जरूरत क्यों पड़ी? इस खबर के बाद से सोशल मीडिया पर कई कमर्चारियों ने इमोशनल ट्विट और पोस्ट किए. लोग भी इसपर भड़के हुए हैं.

AI पर बड़ा दांव बना वजह

Oracle का फोकस अब तेजी से बदल रहा है. कंपनी पारंपरिक सॉफ्टवेयर सर्विसेज से हटकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रही है. रिपोर्ट्स के अनुसार, Oracle ने OpenAI के लिए लगभग 156 बिलियन डॉलर के डेटा सेंटर प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है.

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इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी को अगले पांच साल में बड़े पैमाने पर AI इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना है. इसके लिए करीब 30 लाख हाई-एंड चिप्स खरीदे जाने की योजना है. ये निवेश इतना बड़ा है कि कंपनी को अपने खर्चों को संतुलित करने के लिए दूसरे क्षेत्रों में कटौती करनी पड़ रही है, जिसमें सबसे बड़ा असर कर्मचारियों पर पड़ा है.

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बढ़ता कर्ज और आर्थिक दबाव

Oracle पर इस समय भारी कर्ज का बोझ है, जो 100 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा बताया जा रहा है. इस कर्ज के कारण कंपनी पर कैश फ्लो बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है. इन परिस्थितियों में छंटनी को एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है. अनुमान है कि इससे कंपनी को 8 से 10 बिलियन डॉलर तक की बचत हो सकती है, जिसे AI प्रोजेक्ट्स में निवेश किया जाएगा. इसके अलावा, कंपनी ने मार्च में 2.1 बिलियन डॉलर का रीस्ट्रक्चरिंग प्लान भी पेश किया था, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा पहले ही खर्च हो चुका है.

निवेशकों और बैंकों की चिंता

Oracle की वित्तीय स्थिति को लेकर निवेशकों और बैंकों में भी चिंता बढ़ रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी के कर्ज का बीमा खर्च काफी बढ़ गया है, जो 2009 के आर्थिक संकट के स्तर तक पहुंच गया है. Barclays जैसे बड़े बैंक ने Oracle के कर्ज को डाउनग्रेड करते हुए चेतावनी दी है कि कंपनी 'जंक' स्टेटस के करीब पहुंच सकती है. इसका मतलब है कि कंपनी के डिफॉल्ट का जोखिम बढ़ सकता है. कुछ बैंकों ने Oracle के नए प्रोजेक्ट्स के लिए लोन देना भी कम कर दिया है, जिससे कंपनी की फाइनेंशियल स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है.

OpenAI पर निर्भरता भी बनी जोखिम

Oracle के AI डेटा सेंटर प्रोजेक्ट का बड़ा हिस्सा OpenAI पर निर्भर है, लेकिन खबरें हैं कि OpenAI अब Nvidia के नए और ज्यादा तेज चिप्स की ओर देख रहा है. अगर ऐसा होता है तो Oracle के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाएगा. टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है और कई बार डेटा सेंटर तैयार होने से पहले ही उनकी तकनीक पुरानी पड़ जाती है. इससे कंपनी के लिए बड़ा वित्तीय जोखिम पैदा हो सकता है.

भारत पर सबसे ज्यादा असर

इस छंटनी का सबसे ज्यादा असर भारत में देखा जा रहा है. देश में Oracle के करीब 30,000 कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें से लगभग 12,000 लोगों की नौकरी जाने की आशंका जताई जा रही है. ये IT सेक्टर के लिए एक बड़ा झटका है, खासकर ऐसे समय में जब पहले से ही ऑटोमेशन और AI के कारण नौकरियों पर दबाव बना हुआ है.

शेयर बाजार की दिलचस्प कहानी

दिलचस्प बात ये है कि छंटनी की खबर के बावजूद Oracle के शेयर में करीब 6% की तेजी देखी गई. कंपनी ने हाल ही में 17.2 बिलियन डॉलर का रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले 15 सालों में सबसे ज्यादा है. हालांकि, लंबी अवधि में कंपनी के शेयर में गिरावट आई है। सितंबर 2025 में 346 डॉलर तक पहुंचने वाला शेयर अब करीब 146 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है. इस गिरावट का असर कंपनी के फाउंडर Larry Ellison की संपत्ति पर भी पड़ा है, जो हाल के महीनों में काफी कम हुई है.

भविष्य की रणनीति

Oracle का ये कदम साफ दिखाता है कि कंपनी अब पूरी तरह AI और क्लाउड की ओर शिफ्ट हो रही है. ये बदलाव सिर्फ Oracle तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी टेक इंडस्ट्री में यही ट्रेंड देखने को मिल रहा है. हालांकि, इस बदलाव की कीमत कर्मचारियों को चुकानी पड़ रही है. आने वाले समय में और कंपनियां भी इसी तरह के फैसले ले सकती हैं, जहां ऑटोमेशन और AI के कारण पारंपरिक नौकरियां कम होती जाएंगी.

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Published Date:April 1, 2026 8:24 PM IST

Updated Date:April 1, 2026 8:24 PM IST