नई दिल्ली: कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे ने इस बार अधिकतर एग्जिट पोल को सही साबित कर दिया है. 12 मई को वोटिंग के बाद आए अधिकतर एग्जिट पोल में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने और कर्नाटक में त्रिशंकु विधानसभा बनने का अनुमान लगाया गया था, हालांकि बीजेपी, कांग्रेस और जेडीएस तीनों ही पार्टियां अपने दम पर सरकार बनाने का दावा कर रही थीं. साल 2013 के विधानसभा चुनाव में 40 सीट जीतने वाली बीजेपी ने इस बार 104 सीट जीतकर बढ़त जरूर हासिल की है लेकिन वो स्पष्ट बहुमत तक नहीं पहुंच सकी. बीजेपी ने कर्नाटक में इस बार बी. एस येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ा था, वोटिंग के बाद येदियुरप्पा ने कहा था कि बीजेपी पूर्ण बहुमत से जीतेगी और वो ही कर्नाटक के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे. लेकिन अब जो सियासी समीकरण बन रहे हैं उससे ये सवाल उठ रहा है कि क्या येदियुरप्पा बीजेपी के अगले धूमल बनने की ओर आगे बढ़ रहे हैं?

येदियुरप्पा का धूमल से क्या कनेक्शन?
पिछले साल दिसंबर में हुए हिमाचल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने नेता प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ा था. हिमाचल में कई सालों से ये ट्रेंड रहा है कि हर पांच साल बाद सरकार बदलती है इसलिए बीजेपी राज्य में अपनी जीत को लेकर निश्चिंत थी. प्रेम कुमार धूमल भी पूरी तरह से राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार थे लेकिन सियासी समीकरण ऐसे बिगड़े कि बीजेपी के लिए राज्य में खुशी और गम दोनों की स्थिति बन गई.

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बीजेपी हिमाचल में 68 में से 44 सीट लाकर जीत तो गई लेकिन उसके मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल अपनी सीट से चुनाव हार गए और मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए. हालांकि काफी दिनों तक हिमाचल में सीएम के पद को लेकर खींचतान की स्थिति बनी रही लेकिन अंत में धूमल को मायूस होना पड़ा और पार्टी ने जयराम ठाकुर को हिमाचल का सीएम बना दिया.

कर्नाटक में हालांकि येदियुरप्पा अपनी सीट पर चुनाव जीत गए हैं लेकिन पार्टी स्पष्ट बहुमत से 8 सीट पीछे रह गई है और दूसरी तरफ कांग्रेस ने जेडीएस को समर्थन देकर बीजेपी और खासकर येदियुरप्पा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. अब लगभग हिमाचल जैसी ही स्थिति कर्नाटक में भी बन सकती है जहां मुख्यमंत्री बनने का ख्वाब देख रहे येदियुरप्पा को मायूस होना पड़ सकता है.

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जेडीएस ने कांग्रेस को दिया समर्थन
कर्नाटक में कांग्रेस को 78 सीट मिली है और जेडीएस को 37 सीट मिली है. कांग्रेस किसी भी कीमत पर बीजेपी को सरकार बनाने से रोकना चाहती है ऐसे में कांग्रेस ने जेडीएस को बिना किसी शर्त के समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. जेडीएस ने भी अपने नेता कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कांग्रेस से समर्थन लेने का ऐलान कर दिया है और राज्यपाल से मिलने का वक्त भी मांगा है. इस नए समीकरण ने सबसे बड़ी पार्टी बनी बीजेपी के लिेए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.

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क्या है बीजेपी की मुश्किल?
कर्नाटक में बीजेपी के सामने खुशी और गम दोनों की स्थिति बन गई है. खुशी इसलिए कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है और दुख इस बात का पार्टी सिर्फ 8 सीट से बहुमत से दूर रह गई. अब बीजेपी के सामने समस्या ये है कि अगर वो सरकार बनाने के लिए जेडीएस से गठबंधन करती है तो जेडीएस अपने नेता कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाना चाहेगी जबकि बीजेपी ने येदियुरप्पा को सीएम उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ा है.

ऐसे में पार्टी के लिए इस पर समझौता करना मुश्किल होगा. लेकिन अगर बीजेपी में ये फैसला होता है कि किसी भी कीमत पर कर्नाटक में सरकार बनानी है तो फिर पार्टी कुमारस्वामी को भी मुख्यमंत्री बनाने पर राजी हो सकती है ऐसे में येदियुरप्पा मुख्यमंत्री बनते बनते रह जाएंगे और वो बीजेपी के अगले धूमल बन जाएंगे.