नई दिल्ली: आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने को, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य और पाकिस्तान मामलों के विशेषज्ञ तिलक देवेशर भारत के लिए बहुत सकारात्मक कदम मानते हैं. हालांकि, वह यह भी कहते हैं कि आतंकियों पर पाबंदी को लेकर संयुक्त राष्ट्र के निर्धारित कानून होने के बावजूद अगर पाकिस्तान ने इच्छाशक्ति नहीं दिखाई तो अजहर पर बंदिशों का कोई असर नहीं होगा. पेश हैं इस घटनाक्रम पर, केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय में विशेष सचिव रह चुके देवेशर से भाषा के पांच सवाल और उनके जवाब :

सवाल : भारत के संदर्भ में आप इस घटनाक्रम को कूटनीतिक और रणनीतिक नजरिये से किस तरह देखते हैं?

जवाब : यह हर तरह से भारत के लिए बहुत सकारात्मक घटनाक्रम है. हम लंबे समय से मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने की कोशिश कर रहे थे. हालांकि पाकिस्तान को चीन के समर्थन की वजह से अब तक यह संभव नहीं हो पा रहा था. लेकिन अब हमारे कूटनीतिक कदमों और सहयोगी देशों, विशेष रूप से अमेरिका, फ्रांस तथा ब्रिटेन से हमें मिले समर्थन की वजह से यह संभव हो सका है. यह पाकिस्तान के लिए अहम संदेश है कि वह अपने तौर—तरीके सुधार ले और भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले समूहों का समर्थन बंद करे.

सवाल : लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद जैसे अन्य आतंकियों पर भी पहले प्रतिबंध लग चुका है लेकिन पाकिस्तान में ऐसे लोगों पर कोई पाबंदी नहीं दिखाई देती?

जवाब : यह सच है कि सईद पाकिस्तान में आजादी से घूमता है. इसकी वजह, उस पर जरूरी पाबंदियां लगाने में पाकिस्तान की अनिच्छा है. अगर पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ गंभीर होता तो बंदिश काफी पहले लग चुकी होती. हालांकि यहां दो चीजें महत्वपूर्ण हैं. पहली तो यह कि पाकिस्तान ने सईद पर पाबंदी नहीं लगाकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष अपनी ही पोल खोल दी है कि वह आतंकवाद से निपटने में गंभीर नहीं है. दूसरी बात है कि सईद और उसके जैसे अन्य आतंकियों की गतिविधियों पर रोकथाम नहीं होने की वजह से पाकिस्तान आज फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स :एफएटीएफ: के दबाव का सामना कर रहा है.

सवाल : संयुक्त राष्ट्र के कानून और नियम अजहर की गतिविधियों पर रोकथाम में कैसे प्रभावी होंगे? वह पाकिस्तान में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किस तरह के प्रतिबंधों का सामना करेगा?

जवाब : इस संबंध में निर्धारित कानून हैं. हालांकि पाकिस्तान की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा मंशा ही इस दिशा में अहम होंगे. कार्रवाई की इच्छाशक्ति न होने पर पाकिस्तान में उसकी घूमने—फिरने की आजादी तथा उसकी गतिविधियों पर कोई असर नहीं पडे़गा.

सवाल : संयुक्त राष्ट्र का यह कदम आतंकवाद को रोकने में भारत के लिए किस तरह लाभकारी होगा ?

जवाब : आतंकवाद से हमें खुद ही निपटना होगा. आतंकवादियों और आतंकी ढांचों को खत्म करना होगा. अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह नहीं कर सकता. उनसे पाकिस्तान पर उसकी जमीन से आतंकी ढांचों को नेस्तनाबूद करने के लिए दबाव बनाने की अपेक्षा की जा सकती है लेकिन इस दिशा में पाकिस्तान अनिच्छुक ही बना हुआ है.

सवाल : क्या संयुक्त राष्ट्र के इस ऐलान के बाद पाकिस्तान अलग—थलग पड़ जाएगा ?

जवाब : यह प्रतिबंध भारत के लिए बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है. हम पाकिस्तान से पनप रहे आतंकवाद के बारे में जो भी कहते आ रहे थे, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने उसे स्वीकार किया है. आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान निश्चित रूप से अलग—थलग पड़ा है. हालांकि हर देश के बहुआयामी हित और साझेदारियां होती हैं और किसी देश को पूरी तरह अलग—थलग करना आसान नहीं है.