मोदी सरकार नोटबंदी के बाद देशभर के लोगों को बड़ा तोहफा दे सकती है। इसके तहत देश के हर नागरिक को हर महीने आमदनी के तौर पर एक तय राशि मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक, आर्थिक सर्वे और आम बजट में इसका ऐलान हो सकता है। हर अकाउंट में 500 रुपये डाल कर योजना की शुरुआत हो सकती है। इससे देश भर के करीब 20 करोड़ जरूरतमंदों को फायदा मिल सकता है।

सूत्रों के अनुसार, इस योजना पर सहमति बन गयी है मगर इस बात पर अभी अंतिम निर्णय लेना बाकि है कि क्या ये पैसा सभी को दिया जाए या फिर केवल बेरोजगारों को ही प्रदान किया जाए। आपको बता दें कि यह प्रस्ताव लंदन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर गाय स्टैंडिंग ने तैयार किया है।

जिनीवा से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार से जुड़े एक जिम्मेदार शख्स ने कन्फर्म किया है कि बजट में इसका ऐलान मुमकिन है। प्रफेसर गाय ने संकेत दिया कि सरकार इसे फेज वाइज लागू कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मध्य प्रदेश की एक पंचायत में पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर ऐसी स्कीम पर काम किया था, जहां बेहद साकारत्मक नतीजे आए थे।
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प्रोफेसर गाय का कहना है कि उन्होने मैंने अपने प्रपोजल में अमीर-गरीब सबके लिए निश्चित आमदनी की बात कही है। प्रफेयर गाय पूरी दुनिया में यूनिवर्सल बेसिक इनकम की पुरजोर वकालत करते रहे हैं। प्रोफेसर गाय ने कहा कि यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम पर पेश रिसर्च को इकनॉमिक सर्वे रिपोर्ट में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने उनसे इस बारे में बात की थी और जानकारी दी थी।

वहीं कुछ आर्थिक जानकारों का मानना है कि योजना तभी सफल होगी जब अमीर-गरीब का भेद किए बिना हर नागरिक को खास इनकम हर महीने मिले। यदि इसमें भेद किया गया तो फिर ये स्कीम अपने मूल रुप में नहीं रहेगी। बल्कि इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा।

प्रोफेसर गाय ने यह भी कहा कि मैंने अपनी रिपोर्ट में फंड के बारे में भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मेरे हिसाब से अगर स्कीम को पूरे देश में लागू किया जाता है तो जीडीपी का 3 से 4 फीसदी खर्च आएगा, जबकि अभी कुल जीडीपी का 4 से 5 फीसदी सरकार सब्सिडी में खर्च कर रही है।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस स्कीम को लागू करने के बाद सरकार को चरणबद्ध तरीके से सब्सिडी समाप्त करने की दिशा मे भी कदम उठाना पड़ेगा। यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम और सब्सिडी दोनों साथ-साथ नहीं चल सकतीं।