नई दिल्ली. मंगलवार को कर्नाटक विधानसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद से जनता दल (एस) के नेता एच.डी. कुमारस्वामी के प्रदेश का सीएम बनने की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी थीं. शाम तक कांग्रेस ने भी जेडीएस को समर्थन दे दिया. बुधवार को दिनभर कुमारस्वामी, कर्नाटक के होने वाले सीएम के रूप में चर्चित रहे. लेकिन रात होते-होते सियासी स्थितियां बदल गईं और राज्यपाल वजुभाई वाला ने भाजपा के येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दे दिया और कुमारस्वामी का सपना धूमिल पड़ने लगा. कांग्रेस और जेडीएस इस पर सुप्रीम कोर्ट चले गए. कोर्ट ने येदियुरप्पा को शपथ लेने की मंजूरी देते हुए भी जेडीएस के लिए एक ‘रास्ता’ बचाए रखा. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट फिर इस मामले की सुनवाई करेगा, तभी तय होगा कि येदियुरप्पा सीएम रहेंगे या नहीं. संयोग यह है कि शुक्रवार को ही जेडीएस के प्रमुख और पूर्व पीएम एच.डी. देवेगौड़ा का जन्मदिन भी है. ऐसे में बेटे कुमारस्वामी की इच्छा तो यही होगी कि सुप्रीम कोर्ट उनके पक्ष में फैसला दे और वे एक बार फिर सीएम बनने का ‘सपना’ पूरा कर सकें. यदि ऐसा होता है तो कुमारस्वामी की तरफ से यह अपने पिता को बेहतरीन ‘गिफ्ट’ होगा. लेकिन राजनीति में पहले से कुछ अनुमान लगाना मुश्किल है. Also Read - लद्दाखवासी कहते हैं चीन ने हमारी जमीन ली और प्रधानमंत्री कहते हैं नहीं, कोई तो झूठ बोल रहा है: राहुल

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मैसूर रियासत में जन्म, पेशे से इंजीनियर

पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा का जन्म 18 मई 1933 को मैसूर रियासत के होलेनरसिंहपुरा तालुका के हरदनहल्ली गांव में हुआ था. कर्नाटक में नाम के साथ जन्मस्थान और पिता का नाम लगाने की परंपरा के कारण ही उनका पूरा नाम हरदनहल्ली डोडेगौड़ा देवेगौड़ा है. कर्नाटक की सियासत में लिंगायत समुदाय के बाद सबसे ताकतवर समुदाय के रूप में माने जाने वाले वोक्कालिंगा समुदाय में जन्मे देवेगौड़ा का परिवार खेती-किसानी से जुड़ा था. प्राथमिक शिक्षा के बाद देवेगौड़ा ने कर्नाटक के हासन जिले के पॉलिटेक्निक कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा हासिल की. 1954 में चेनम्मा के साथ शादी के बाद उनके 6 बच्चे हुए. 1953 में देवेगौड़ा ने सक्रिय राजनीति में कदम रखते हुए कांग्रेस ज्वाइन किया. लेकिन 1962 में वे होलेनरसिंहपुरा से बतौर निर्दलीय उम्मीदवार विधायक बने. इस सीट से वे लगातार 6 बार विधायक चुने गए. आपातकाल के दौरान उन्हें कुछ समय जेल में भी बिताना पड़ा. इसके बाद देवेगौड़ा जनता पार्टी में शामिल हो गए. 1994 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने सरकार बनाई और देवेगौड़ा कर्नाटक के सीएम बने.

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प्रदेश की राजनीति से उठकर सीधे पीएम बने

वर्ष 1996 में पी.वी. नरसिंह राव की सरकार के कार्यकाल के बाद हुए लोकसभा के चुनाव में केंद्र में सत्ता पाने के लिए घमासान मचा. उस समय कांग्रेस और भाजपा के अलावा बाकी सभी क्षेत्रीय दलों ने मिलकर संयुक्त मोर्चे का गठन किया. सियासी समीकरण कुछ ऐसा बैठा कि एच.डी. देवेगौड़ा को संसदीय दल का नेता चुन लिया गया और वे प्रदेश की सत्ता से उठकर सीधे प्रधानमंत्री की कुर्सी पर आ बैठे. एच.डी. देवेगौड़ा देश के 11वें प्रधानमंत्री के रूप में 1 साल से कम अवधि तक ही इस पद पर रहे. वे 1 जून 1996 से लेकर 11 अप्रैल 1997 तक देश के पीएम रहे. लेकिन समर्थन वापसी के खेल में उनकी कुर्सी चली गई. इसके बाद वे केंद्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के तौर पर तो देखे जाते रहे, लेकिन सक्रिय रूप से केंद्रीय राजनीति में भागीदारी निभाने का उन्हें फिर कभी मौका नहीं मिला. 1999 में उन्होंने पूर्व पीएम इंदर कुमार गुजराल के साथ मिलकर जयप्रकाश नारायण के जमाने से जाने गए जनता दल (सेकुलर) का फिर से गठन किया. तब से देवेगौड़ा इसी पार्टी के प्रमुख के तौर पर राजनीति कर रहे हैं.