क्या नए वक्फ कानून पर लग जाएगी रोक? जानें सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने दीं क्या-क्या दलीलें

वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (16 अप्रैल) को निम्नलिखित निर्देशों के साथ एक अंतरिम आदेश पारित करने का प्रस्ताव रखा.

Published date india.com Published: April 16, 2025 6:58 PM IST
क्या नए वक्फ कानून पर लग जाएगी रोक? जानें सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने दीं क्या-क्या दलीलें

Supreme Court on Waqf Act: केंद्र सरकार के वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बुधवार (16 अप्रैल) यानी आज दो घंटे सुनवाई हुई. इस कानून के खिलाफ 100 से ज्यादा याचिकाएं लगाई गई हैं. इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई संजीव खन्ना, जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने सुनवाई की. सुप्रीम कोर्ट में असदुद्दीन ओवैसी, कपिल सिब्बल, अभिषेक मनुसिंघवी, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, सहित अन्य याचिकाकर्ता के वकीलों ने बहस की.

सुनवाई के दौरान किसने क्या कुछ कहा?

  • चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी से कहा, ‘हमें बताया गया है कि दिल्ली हाई कोर्ट वक्फ भूमि पर बना है. हम यह नहीं कह रहे हैं कि सभी वक्फ का इस्तेमाल गलत है, लेकिन वास्तविक चिंता है.’
  • चीफ जस्टिस ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ‘आप ऐसे वक्फ को कैसे पंजीकृत करेंगे जो लंबे समय से वहां हैं? उनके पास कौन से दस्तावेज होंगे… इससे कुछ खत्म हो जाएगा. हां, कुछ दुरुपयोग हुआ है, लेकिन वास्तविक वक्फ भी हैं. मैंने प्रिवी काउंसिल के फैसलों को भी पढ़ा है. उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ को मान्यता दी गई है. अगर आप इसे खत्म करते हैं, तो यह एक समस्या होगी.’
  • एक बहस के दौरान, जस्टिस खन्ना ने कहा, ‘जब 100 या 200 साल पहले किसी सार्वजनिक ट्रस्ट को वक्फ घोषित किया जाता है… तो अचानक आप कहते हैं कि इसे वक्फ बोर्ड की तरफ से अपने अधीन कर लिया गया है.’ मेहता ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि इसका मतलब है कि अगर किसी के पास वक्फ है, तो उसे ट्रस्ट बनाया जा सकता है और इसके लिए एक सक्षम प्रावधान है. मुख्य न्यायाधीश ने तब टिप्पणी की ‘आप अतीत को फिर से नहीं लिख सकते.’
  • एक और बहस तब हुई जब चीफ जस्टिस ने कहा, ‘तो, अधिनियम के अनुसार, आठ सदस्य मुस्लिम हैं. दो मुस्लिम नहीं हो सकते. फिर बाकी गैर-मुस्लिम हैं.’ तब सॉलिसिटर जनरल मेहता ने टिप्पणी की, ‘तो यह पीठ भी मामले की सुनवाई नहीं कर सकती.’ सीजेआई खन्ना ने पलटवार किया ‘क्या? जब हम यहां बैठते हैं, तो हम अपना धर्म खो देते हैं. हमारे लिए, दोनों पक्ष एक जैसे हैं. आप इसकी तुलना न्यायाधीशों से कैसे कर सकते हैं? फिर हिंदू बंदोबस्ती के सलाहकार बोर्ड में गैर-मुस्लिम भी क्यों नहीं हैं?
  • पीठ ने कहा, ‘क्या आप यह कह रहे हैं कि अब से आप मुसलमानों को हिंदू बंदोबस्ती बोर्ड का हिस्सा बनने की अनुमति देंगे. इसे खुलकर कहें.’ सॉलिसिटर जनरल मेहता ने अदालत से कहा, ‘आप कानून से निपट रहे हैं/ एक संयुक्त संसदीय समिति थी. 38 बैठकें हुईं/ इसने कई क्षेत्रों का दौरा किया… इसने 98 लाख से अधिक ज्ञापनों की जांच की। फिर यह दोनों सदनों में गया और फिर कानून पारित हुआ.’
  • गुरुवार को दोपहर 2 बजे मामले की फिर से सुनवाई करने पर सहमति जताते हुए मुख्य न्यायाधीश खन्ना ने कहा कि अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा परेशान करने वाली थी.

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