ईरान-इजरायल की जंग के बीच क्या देश में बढ़ने वाली है पेट्रोल-डीजल की कीमत? सरकार की तरफ से आ गया अपडेट

Petrol-Diesel Price Update: भारत में 40 फीसदी फ्यूल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए आता है, जबकि 60% अलग-अलग रास्तों के जरिए पहुंचता है. ऐसे में फिलहाल हमारे पास दूसरे रास्तों से भी फ्यूल आ रहा है.

Published date india.com Updated: March 9, 2026 7:00 PM IST
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Iran Israel War Update: ईरान-इजरायल के बीच जंग जारी है. जंग में इजरायल को अमेरिका का साथ मिल रहा है. जंग अगर ज्यादा लंबी चली तो भारत समेत पूरी दुनिया में इसका असर पड़ेगा. भारत में इसका असर दिखना शुरू भी हो चुका है. भारत में LPG की कीमतों में इजाफा किया गया है. वहीं, लोगों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का डर सता रहा है. हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि मौजूदा हालात में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों (Petrol-Diesel Price) में इजाफा होने की आशंका नहीं है. Zee News ने सरकारी सूत्रों के हवाले से इसकी जानकारी दी.

देश में कितना है क्रूड ऑयल?

सरकारी सूत्र के हवाले से Zee News ने बताया कि देश में 25 दिनों का क्रूड और 25 दिनों का तैयार माल मौजूद है. उन्होंने बताया कि G7 की तरफ से जैसे ही इस तरह का संकेत मिला कि वह स्टॉक रिलीज कर सकते हैं उसी के चलते क्रूड ऑयल की कीमत भागी थी. हालांकि शाम होते-होते वह थोड़ी कम हो गई. मौजूदा हालात में उम्मीद यही है कि क्रूड ऑयल की कीमत $100 के करीब बनी रहेगी.

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‘एविएशन इंडस्ट्री को भी चिंता करने की जरूरत नहीं’

भारत में 40 फीसदी फ्यूल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए आता है, जबकि 60% अलग-अलग रास्तों के जरिए पहुंचता है. ऐसे में फिलहाल हमारे पास दूसरे रास्तों से भी फ्यूल आ रहा है. उन्होंने बताया कि अभी एविएशन इंडस्ट्री को भी चिंता करने की जरूरत नहीं है.

10 दिन दिन में कितना बढ़ा रेट

ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध शुरू हुए 10 दिन बीत चुके हैं. इन 10 दिनों में तेल की कीमत 20 से 25 फीसदी प्रति बैरल तक बढ़ चुके हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का रेट 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है. युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 64 से 80 डॉलर प्रति बैरल थी. इस बीच विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तेल की कीमत सारे रिकॉर्ड तोड़ सकती है.

‘कच्चे तेल की कीमत में तेजी से नहीं बढ़ेगी महंगाई’

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का महंगाई पर खास असर पड़ने की संभावना नहीं है. सीतारमण ने लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में कहा कि वैश्विक कच्चे तेल और भारतीय बास्केट (अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों का भारांश औसत, जिनकी खरीद भारतीय रिफाइनरी करती हैं) दोनों की कीमतों में पिछले एक वर्ष से लगातार गिरावट का रुख था. 28 फरवरी, 2026 को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से इसमें तेजी आई है.

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वित्त मंत्री ने कहा, ‘फरवरी के अंत से 2 मार्च, 2026 तक कच्चे तेल की कीमत (भारतीय बास्केट) 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 80.16 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई. चूंकि भारत में मुद्रास्फीति अपने निचले स्तर के करीब है, इसलिए फिलहाल महंगाई पर इसका प्रभाव महत्वपूर्ण नहीं माना जा रहा है.’

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