अगले साल होने वाले आम चुनावों के लिए कांग्रेस ने तैयारी शुरू कर दी है. पीएम मोदी को टक्कर देने के लिए कांग्रेस ने राहुल गांधी का नाम आगे बढ़ाया है. कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख और मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि, ‘‘मोदीजी का विकल्प केवल और केवल राहुलजी हैं. कोई और नहीं हो सकता. कांग्रेस और देश के लोग राहुलजी को देश का अगला प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं.’’ Also Read - प्रधानमंत्री की दीये जलाने की अपील भाजपा का छुपा एजेंडा: एचडी कुमारस्वामी

एक ओर जहां सुरजेवाला ने राहुल गांधी का पीएम पोस्ट के लिए नाम आगे बढ़ाया है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस विपक्षी एकजुटता को लेकर भी प्रयास कर रही है. विपक्षी एकता के बारे में पूछने पर सुरजेवाला ने कहा कि बीजेडी, शिवसेना और अब टीडीपी धीरे-धीरे एनडीए से अलग हो रहे हैं जबकि ‘‘कांग्रेस विभिन्न दलों की एकता की धुरी बनती जा रही है. ‘‘यह एकता 2019 में बदलाव का आधार बनेगी.’’ Also Read - Covid-19: राहुल गांधी ने अमेठी में शुरू कराया सेनिटाइजर और मास्क का वितरण

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शरद पवार की पार्टी एनसीपी ने सुरजेवाला के सुर में सुर मिलाया है. एनसीपी के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने कहा कि इस वक्त कांग्रेस अध्यक्ष ही अगले साल होने वाले चुनावों में मोदी का विकल्प है. गुजरात विधानसभा चुनाव और राजस्थान के उपचुनाव के नतीजों से साफ हो गया है कि राहुल गांधी में नेतृत्व करने की क्षमता है.

एनसीपी के अलावा बिहार में आरजेडी भी कांग्रेस के साथ नजर आ रही हैं. हालांकि, उन्होंने राहुल गांधी के पीएम उम्मीदवार होने पर अभी तक कोई कमेंट नहीं किया है. मगर लालू के जेल जाने और नीतीश कुमार के अलग होने के बाद उनके पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं.

डीएमके को लेकर सस्पेंस

तमिलनाडु की सियासत तेजी से बदल रही हैं. सुपरस्टार रंजनीकांत ने भी सियासत में एंट्री कर ली है. वैसे वह कितने सफल होते हैं यह तो वक्त ही बताएगा मगर टू जी केस में बरी होने के बाद डीएमके कांग्रेस के साथ रहेगी. इस सवाल का जवाब खुद कांग्रेस तलाश रही है.

सपा की अलग राह

पिछले साल हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ मैदान में उतरी सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कुछ दिनों पहले कांग्रेस के साथ गठबंधन न करने का ऐलान किया था. वैसे ऐसा भी कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव को पीएम के लिए मोदी के विकल्प के रूप में देख रही हैं. ऐसे में राहुल गांधी को अगर सपा को साथ लेना है तो बहुत ज्यादा प्रयास करने हंगे.

सीपीएम भी नहीं है साथ

वहीं, कुछ दिनों पहले सीपीएम के पोलित ब्यूरों में कांग्रेस से गठबंधन करने वाला प्रस्ताव गिर गया है. जबकि ये प्रस्ताव खुद सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी ने पेश किया था. सीपीएम और कांग्रेस ने 2016 के बंगाल के विधानसभा चुनाव में गठबंधन किया था. इस गठबंधन का फायदा कांग्रेस को हुआ और नुकसान सीपीएम को.

अगर राहुल गांधी को 2019 में पीएम मोदी को टक्कर देनी है तो उन्हें सभी बीजेपी विरोधी दलों को अपने साथ लेना होगा. 2004 में सोनिया गांधी ने ऐसे ही किया था और पार्टी को कामयाबी मिली थी.