नई दिल्‍ली : कांग्रेस प्रेसिडेंट राहुल गांधी कर्नाटक की अपनी चार दिनों की यात्रा पर पहुंचे हैं. इस दौरान उनके दो मंदिरों में दर्शन करने का प्रोग्राम है. शनिवार को राहुल कर्नाटक के कोप्‍पल जिले में हुलिगेम्‍मा मंदिर सिद्धेश्‍वरा मठ पहुंचे. यह मठ लिंगायत समाज की श्रद्धा का केंद्र है. राज्‍य की सियासत में लिंगायत वोटर बहुत अहम हैं. उनकी इस यात्रा के दौरान मंदिर में दर्शन को एक बार फि‍र चुनावी सियासत से लेकर जोड़ा जा रहा है. Also Read - स्टार प्रचारक का दर्जा रद्द: कमलनाथ बोले- EC ने मुझे कोई नोटिस नहीं दिया, मेरे वकील देखेंगे इस मामले को

कांग्रेस शासित राज्‍य कर्नाटक में कुछ महीनों में चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में देखा जा रहा है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल की मंदिर-मठों जैसी यात्राएं कर्नाटक में भी कांग्रेस को फायदा पहुंचा सकती हैं और पार्टी यहां इस फॉर्मूले से अपनी सत्‍ता बचाए रख सकती है. Also Read - Bihar Assembly Election 2020 : तेजस्वी का भाजपा पर निशाना, 'पहले महंगाई इनके लिए 'डायन' थी, अब 'भौजाई' बन गई'

अगर बीते गुजरात विधानसभा चुनाव पर नजर डाले तों राज्‍य में राहुल गांधी ने 85 दिनों के चुनाव प्रचार अभियान के दौरान 27 मंदिरों में जाकर देवी-देवताओं के दर्शन किए थे. इस दौरान राहुल कई मंदिरों और मठों के धार्मिक नेताओं से भी मिले थे. राहुल गुजरात में कांग्रेस काो सत्‍ता तो नहीं दिला पाए, लेकिन कांग्रेस पार्टी पीएम नरेंद्र मोदी के गृहराज्‍य में बीजेपी के सामने कड़ी चुनौती बनकर उभरी और 77 सीटें पाने में कामयाब रही. विश्‍लेषकों का मानना था कि गुजरात में मंदिरों और मठों से प्रभावित करीब 87 सीटें थीं और इनमें से 47 पर कांग्रेस अपनी जीत का परचम लहराने में कामयाब रही. Also Read - यूपी में बीजेपी के लिए अब पहली चुनौती अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी, क्‍या बसपा का ग्राफ गिरेगा?

कांग्रेस पर्दे के पीछे स्‍वीकारती रही है कि लोकसभा और उसके बाद कई राज्‍यों में बीजेपी की सफलता में हिंदुत्‍व कार्ड का अहम रोल रहा है. कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों को मानना है कि राहुल गांधी कांग्रेस की छवि को हिंदुओं के बीच बेहतर बनाने के लिए ‘सॉफ्ट हिंदुत्‍व’ के रास्‍ते पर चलते हुए दिखाई दें तो इसमें आश्‍चर्य नहीं किया जा सकता.

सॉफ्ट और हार्डलाइन के बीच संतुलन
राजनीति के प्रोफेसर नरेन्‍दर पणि का मानना है कि कांग्रेस मिडिल ग्राउंड में खेल रही है और निश्चित रूप से चाहती है कि लोग जानें कि पार्टी धर्म के खिलाफ नहीं है. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि गुजरात के सोमनाथ मंदिर में जाने से कांग्रेस आलोचनाओं से घिरने से डरी नहीं और यह रिस्‍क उठाया. कांग्रेस कहीं न कहीं खुद को हिंदू पहचान से जोड़ने को कोशिश तो कर रही है, लेकिन बीजेपी जैसी हार्डलाइन से खुद को बचाकर भी रखना चाहेगी.

गुजरात बनाम कर्नाटक और कांग्रेस- बीजेपी
कांग्रेस गुजरात में बुरी तरह कमजोर थी. चुनाव के पहले कई नेता बीजेपी का दामन थाम चुके थे. कांग्रेस 22 साल से गुजरात की सत्‍ता से बाहर थी. लेकिन इतने ही साल से राज्‍य में शासन कर रही बीजेपी के खिलाफ एन्‍टी इनकमबेंसी भी था. कांग्रेस राज्‍य में संगठन के स्‍तर पर कमजोर थी, लेकिन एन्‍टी इनकमबेंसी ने बीजेपी के लिए कड़ी चुनौती खड़ी कर दी. कर्नाटक में देखें तो कांग्रेस सरकार के खिलाफ एन्‍टी इनकमबेंसी तो हो सकती है, लेकिन सत्‍ता में होने पर सत्ता में होने पर भी निचले स्तर पर उसकी पकड़ कमजोर नहीं हुई है.

चेहरों के बीच मुकाबला
कर्नाटक में बीजेपी पूर्व सीएम बीएस येदुयुरप्‍पा को चेहरा बनाने की मंशा जता चुकी है, जिनका जातीय आधार तो काफी है, लेकिन भ्रष्‍टाचार को लेकर कुर्सी से हटाए गए येदुयुरप्‍पा की आम जनता के बीच कितनी स्‍वीकार्यता है. वहीं, कांग्रेस के पास सिद्धरमैया जैसा चेहरा है, जो राज्‍य में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं. हाल ही में बीजेपी शासित राजस्‍थान में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट भाजपा से छीनने के बाद कांग्रेस में उत्‍साह है, वहीं , बीजेपी कर्नाटक सरकार के खिलाफ तेज सियासी मुहिम छेड़े हुए हैं.

मोदी की आक्रामक लीडरशिप
गुजरात के प्रदर्शन से भी कांग्रेस को मदद मिल सकती है. लेकिन बीजेपी की राष्‍ट्रीय लीडरशिप में नरेन्‍द्र मोदी जैसे मजबूत नेता के मुकाबले अभी भी कांग्रेस के पास कोई प्रभावी लीडर दिखाई नहीं दे रहा. मोदी ऐसे नेता हैं, जिनकी आक्रामक भाषण शैली वोटरों के रुख को कभी भी बदल सकती है.

मुकाबला त्रिकोणीय
गुजरात में मुकाबला सीधे कांग्रेस और बीजेपी के बीच था, जबकि कर्नाटक में तीसरी बड़ी पार्टी जनता दल सेक्‍युलर है. राज्‍य की 224 सीटों में से 124 सीटों पर कांग्रेस, 44 बीजेपी और 39 जेडीएस के पास हैं. ऐसे में मुकाबला त्रिकोणीय होने से इनकार नहीं किया जा सकता.

बीजेपी के बयानों के अचूक तीर
शनिवार को राहुल गांधी की कर्नाटक में मंदिर में जाने को लेकर केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष ने कहा, ‘यह क्‍या राहुल गांधी का इलेक्‍शन टूरिज्‍म. मैं खुश होता अगर उन्‍होंने कर्नाटक चुनाव का इंतजार नहीं किया होता.उन्‍हें गुजरात चुनाव के दौरान नवंबर में मंदिर याद आए और अब तीन माह बाद’. केंद्रीय मंत्री के इस बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में राहुल गांधी जब- जब मंदिर मठों में जाएंगे तो भाजपा उन पर सियासी बयानों के तीर छोड़ने से चूकने वाली नहीं है. सियासत में वोटरों का रुख बदलने के लिए नेताओं के बयान चुनावी खेल में काफी अहम है.