नई दिल्‍ली: सभी की निगाहें आज संसद पर टिकी हैं, क्योंकि सोमवार से 26 दिनों तक चलने वाला शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है. सोमवार से शुरू होने जा रहे संसद के शीतकालीन सत्र के काफी गर्मागर्म रहने की संभावना है. संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से शुरू होकर 13 दिसंबर तक चलेगा. विपक्षी दल जहां आर्थिक सुस्ती और कश्मीर में स्थिति को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी में हैं, वहीं, मोदी सरकार विवादित नागरिकता (संशोधन) विधेयक को पारित कराना चाहेगी, जो भाजपा के वैचारिक एजेंडे का अहम हिस्सा है.

इस सत्र में, विपक्ष, जिसने कश्मीर में नेताओं की आर्थिक मंदी और अवैध हिरासत जैसे मुद्दों पर सरकार पर हमला करने के
लिए अपनी ताकत बढ़ा ली है, जबकि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाला केंद्र विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक के माध्यम
से आगे बढ़ना चाहता है. लोकसभा चुनाव में मिले अपार जनादेश के साथ सत्ता में वापसी करने वाली बीजेपी नीत एनडीए सरकार का यह इस कार्यकाल में दूसरा संसद सत्र है. इससे पहले रविवार को, एक सर्वदलीय बैठक के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर देकर कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है और सभी को शीतकालीन सत्र को अंतिम रूप देने के लिए उत्पादक बनाने के लिए प्रेरित किया है.

सदन की कार्यवाही के दौरान नागरिकता विधेयक सहित कुल 35 अध्यादेशों को पेश किए जाने हैं. विवादास्पद नागरिकता (संशोधन) विधेयक, जिसे सत्तारूढ़ दल पाकिस्तान, बांग्लादेश, और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से गैर-मुस्लिमों को नागरिकता देने के उद्देश्य से पारित करना चाहता है, जो 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत आए थे, के लिए उम्मीद की जा रही है.

अन्य प्रमुख बिल जो उठाए जाने की संभावना है, उनमें पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल, 2019, एंटी मैरीटाइम पाइरेसी बिल 2019 और ट्रांसजेंडर पर्सन्स (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स) बिल, 2019 शामिल हैं.

कांग्रेस के नेतृत्व वाले समूह का उत्साह बढ़ा
भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने पिछले सत्र में खासकर राज्यसभा में जहां सत्ता पक्ष बहुमत में नहीं है, वहां स्वतंत्र क्षेत्रीय दलों और कई विरोधी नेताओं को अपने पाले में कर कई विधेयकों को पारित कराकर विपक्ष को चकित कर दिया था. हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों से कांग्रेस के नेतृत्व वाले समूह का उत्साह बढ़ा है. हाल के विधानसभा चुनावों में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन, शिवसेना के साथ भाजपा का संबंध टूटना और आर्थिक सुस्ती पर रिपोर्ट ने हवा का रुख विपक्षी दलों के पाले में कर दिया है.

कई अहम विधेयक दोनों सदनों में पारित हुए थे
बता दें संसद के पहले सत्र के दौरान तीन तलाक की प्रथा को दंडनीय बनाने, राष्ट्रीय जांच एजेंसी को और अधिक शक्तियां देने जैसे कई अहम विधेयक दोनों सदनों में पारित हुए थे. इस दौरान जम्मू कश्मीर के विशेष दर्जे को हटाने और इसे दो केंद्रशासित क्षेत्रों-जम्मू कश्मीर तथा लद्दाख में विभाजित करने का प्रस्ताव भी दोनों सदनों में पारित हुआ था.

प‍िछले सत्र में 35 विधेयक पारित किए गए थे
1952 के बाद से इस सत्र में सबसे अधिक कामकाज हुआ था और 35 विधेयक पारित किए गए. राज्यसभा में कुल 32 विधेयक पारित हुए थे. दोनों सदनों ने जम्मू कश्मीर से विशेष दर्जा हटाने और इसे दो केंद्रशासित क्षेत्रों जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख में विभाजित करने के प्रस्ताव को भी पारित किया.

विपक्ष ने संसद में अपनी संख्या बढ़ाई
शिवसेना के बीजेपी की अगुवाई वाली एनडीए से बाहर होने के साथ विपक्ष ने संसद के शीतकालीन सत्र से पहले अपनी संख्या को बढ़ा ली है. संयुक्त विपक्ष की ताकत लोकसभा में 200 के आंकड़े को पार कर गई है, जहां संख्या की कमी के कारण विपक्ष के नेता का पद रिक्त है.

शिवसेना की ताकत संसद के दोनों सदनों में
शिवसेना के लोकसभा में 18 सांसद हैं और राज्यसभा में तीन सांसद हैं. पार्टी महाराष्ट्र में नए राजनीतिक समीकरण बनने के साथ विपक्ष की बेंच में चली गई है. महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) व शिवसेना की बातचीत चल रही है, जहां फिलहाल राष्ट्रपति शासन लागू है.

शिवसेना विपक्ष की पांचवी सबसे बड़ी पार्टी
लोकसभा वेबसाइट के विवरण के अनुसार, कांग्रेस के लोकसभा में 52 सांसद हैं, द्रमुक के 24, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 22 व वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के 22 सांसद हैं, जबकि शिवसेना विपक्ष की पांचवी सबसे बड़ी घटक पार्टी है.
राज्यसभा में जहां विपक्ष तेजी से अपनी पकड़ खोता जा रहा है, शिवसेना के शामिल होने से इसे ताकत मिली है. शिवसेना के राज्यसभा में तीन सांसद हैं.

ये विपक्ष में लेक‍िन बदलते रहते हैं
हालांकि, एक नेता के अनुसार, तीन महत्वपूर्ण पार्टियां वाईएसआरसीपी, तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और बीजू जनता दल (बीजद) तकनीकी रूप से तो विपक्ष में हैं, लेकिन उनका रुख राजनीतिक सुविधा के अनुरूप बदलता रहता है. (इनपुट: एजेेंसी)