नई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार को ट्रांसजेंडर अधिकारों का संरक्षण विधेयक’ को ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें ट्रांसजेंडर को परिभाषित करने, उनके खिलाफ विभेद का निषेध करने एवं उनके लिंग पहचान का अधिकार प्रदान करने का प्रावधान किया गया है. अलग अलग मुद्दों पर विभिन्न दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच सदन ने 27 सरकारी संशोधनों को स्वीकार करने और कुछ विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए विधेयक को मंजूरी दे दी.

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विधेयक अपने आप में परिपूर्ण
इससे पहले शोर-शराबे के दौरान सदस्यों ने चर्चा में हिस्सा भी लिया. विपक्षी सदस्यों ने इस विधेयक में और सुधार की जरूरत बताई. सदन में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि इस विधेयक में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के हितों का खास ध्यान रखा गया है और यह अपने आप में परिपूर्ण है. इस पर लम्बा विचार विमर्श किया गया जिसमें संबंधित लोग एवं संगठन शामिल हैं.

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उन्होंने कहा कि इस विषय पर मसौदे को वेबसाइट पर रखा गया था और लोगों से सुझाव मांगे गए थे. संसद की स्थायी समिति ने भी इस पर विचार किया और 27 सुझाव मान लिये गए हैं. इस विषय पर कुछ सदस्यों के सुझाव भी मान लिये गए हैं और कुछ सुझाव को नियम बनाते समय शामिल करने का प्रयास किया जायेगा. उन्होंने इस संदर्भ में उच्चतम न्यायालय के फैसले एवं राज्यसभा में तिरूचि शिवा की ओर से पेश निजी विधेयक के पारित होने का जिक्र किया.

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हाशिये पर है ये समुदाय
विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि उभयलिंगी समुदाय (Transgender) देश में एक ऐसा समुदाय है जो सार्वधिक हाशिये पर है. उन्हें समाजिक बहिष्कार से भेदभाव, शैक्षणिक सुविधाओं की कमी, बेरोजगारी, चिकित्सा सुविधाओं की कमी और इसी प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. भारत के संविधान में सभी व्यक्तियों को समता की गारंटी एवं सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित किये जाने के बाद भी उभयलिंगी व्यक्तियों के विरूद्ध विभेद और अत्याचार होना जारी है.