जम्मूः कश्मीर घाटी की आतंकियों के खिलाफ सेना की आक्रमक कार्रवाई से सीमा पार के उनके सरगनाओं में सिरफुटैव्वल शुरू हो गया है. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के सरगना सैयद सलाउद्दीन पर संगठन प्रमुख से पद से हटने का जबर्दस्त दबाव है. आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने यह दबाव बनाया है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक आतंकी संगठनों में इस समय बैखलाहट है और उसने बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है. पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से सालों से सलाउद्दीन हिजबुल और यूनाइटेड जिहाद काउंसिल का प्रमुख बना हुआ है. कश्मीर घाटी में हिजबुल के आतंकियों के खात्मे और उसका प्रभाव कम होने की वजह से लश्कर और जैश जैसे आतंकी संगठनों ने यह दबाव बनाया है. Also Read - भारतीय सेना से जुड़ने का यह है आसान तरीका! ऐसे करेंगे तैयारी तो पूरा हो जाएगा आपका सपना | Watch Video

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हाफिज सईद और मसूद अजहर हुए खिलाफ Also Read - Indian Army Recruitment 2021: 12वीं पास के लिए भारतीय सेना में अप्लाई करने की कल है अंतिम डेट. इस Direct Link से करें आवेदन  

माना जा रहा है कि कश्मीर घाटी में हिजबुल के कमजोर पड़ने का फायदा लश्कर और जैश उठाना चाहते हैं. खुफिया एजेंसियों के मुताबिक सलाउद्दीन ने हिजबुल प्रमुख के पद से हटने की सहमति दे दी है. हिजबुल केवल घाटी में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता है. माना जा रहा है कि लश्कर प्रमुख और मुंबई हमलों का मास्टरमाइंड हाफिज सईद और जैश ए मोहम्मद का प्रमुख मौलाना मसूद अजहर हिजबुल प्रमुख सैयद सलाउद्दीन को हटाने का तानाबाना बुन रहे हैं.

खुफिया एजेंसियों का दावा है कि लश्कर और जैश ने आईएसआई पर दबाव बनाया है कि वह सलाउद्दीन को हटाए. इतना ही नहीं सलाउद्दीन पर दबाव बनाने के लिए लश्कर और जैश ने हिजबुल के टॉप कमांडरों आमिर खान, इम्तियाज आलम और अन्य को भी उसके खिलाफ कर दिया है. हाफिज सईद की तरह सलाउद्दीन भी संयुक्त राष्ट्र की ग्लोबल टेररिट्स की सूची में शामिल है. यूनाइटेज जिहाद काउंसिल (यूजीसी) के प्रमुख के रूप में उसे विशेष तव्वजो मिलती रही है. पाकिस्तान की सेना ने यूजीसी की स्थापना की थी ताकि भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों में संलिप्त संगठनों के बीच बेहतर कोऑडिनेशन स्थापित किया जा सके.

कमांडरों के मारे जाने से कमजोर पड़ा हिजबुल

हिजबुल के टॉप कमांडरों जैसे बुरहान वानी, सबजार भट, सजाद गिलकर और अब्दुल कयूम नजर के मारे जाने के बाद अन्य आतंकी संगठन सलाउद्दीन के खिलाफ लामबंदी में जुट गए हैं. इतना ही नहीं कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों पर हिजबुल के हमले करने में नाकाम रहने पर भी पाकिस्तान की सेना अब जैश और लश्कर को ज्यादा बढ़ावा दे रही है. इस तथ्य की पुष्टि इस बात से हो रही है कि हाल ही में सुंजवान और सीआरपीएफ कैप पर आतंकी हमले को जैश और लश्कर के आतंकियों ने अंजाम दिया. ये दोनों संगठन अब कश्मीरी युवकों में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं. खुफिया सूत्रों ने बताया कि यह सईद और अजहर की दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है जिससे कि सलाउद्दीन को अहम भूमिका से हटाया जा सके.